'हमने गेनीबेन ठाकोर की साड़ी के पल्लू में', गुजरात BJP अध्यक्ष के बयान पर भड़के राहुल गांधी- ये है नारी वंदन?
'हमने गेनीबेन ठाकोर की साड़ी के पल्लू में बंधी पंचायत सीटें खींच ली हैं', गुजरात भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा के इस बयान पर बवाल मच गया है। कांग्रेस की महिला सांसद गेगीबेन ठाकोर पर की गई इस टिप्पणी को कांग्रेस ने अपमानजनक करार दिया है।
विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा की गुजरात इकाई के अध्यक्ष द्वारा कांग्रेस सांसद गेनीबेन ठाकोर पर कथित अभद्र टिप्पणी के बाद पार्टी पर 'विकृत मानसिकता' रखने का आरोप लगाया। गांधी ने इसे 'नारी वंदन' नारे का 'मुखौटा उतरना' और 'महिला विरोधी विचारधारा' का उजागर होना बताया।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की और उसमें "भाजपा के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाया, कहते हुए कि उनका सम्मान तभी तक है, जब तक कोई महिला उनकी सत्ता को चुनौती न दे। उन्होंने पार्टी की कथनी-करनी के अंतर को उजागर कर भाजपा के महिलाओं के प्रति सतही दृष्टिकोण पर जोर दिया।
राहुल गांधी बोले- 'नारी वंदन' का मुखौटा उतर गया'
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा, "गुजरात के भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस की हमारी महिला सांसद गेनीबेन ठाकोर जी पर अभद्र टिप्पणी की है। 'नारी वंदन' का मुखौटा उतर गया। यह सिर्फ़ शर्मनाक नहीं - यह BJP की मनुवादी, महिला-विरोधी विचारधारा का असली चेहरा है। ये है BJP का 'नारी वंदन'? ये करेंगे महिलाओं का सशक्तिकरण?"
राहुल गांधी ने याद दिलाया पीएम मोदी का ये बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने उन्हें महिलाओं की गरिमा संबंधी उनके वक्तव्यों की याद दिलाई। उन्होंने पीएम के शब्दों को दोहराया "एक महिला सब कुछ भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती।"
गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा खुद यह भावना भूल गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पीएम महिला कांग्रेस सांसदों के तीखे सवालों से बचने के लिए "घबराहट में संसद से भाग गए"। ये टिप्पणियां भाजपा के महिला सुरक्षा और सम्मान के दावों पर गंभीर प्रश्न उठाती हैं।
राहुल गांधी बोले- 'अपना अपमान मतदाता नहीं भूलेंगे'
राहुल गांधी ने गेनीबेन ठाकोर के अपमान के लिए चुनावी और सामाजिक परिणामों की कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि गुजरात की एक प्रमुख नेता, जिन्होंने भाजपा की लहर के बावजूद अपनी सीट जीती, उनका अपमान मतदाता नहीं भूलेंगे।
राहुल गांधी नने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "महिला विरोधी भाजपा को यह याद रखना चाहिए - गुजरात और पूरे हिंदुस्तान की महिलाएं हर अपमान का मुंहतोड़ जवाब देंगी।"
भड़की कांग्रेस, बनाएंगी मुद्दा
यह विवाद गुजरात में दोनों दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक घर्षण के बीच सामने आया है। गेनीबेन ठाकोर राज्य में कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभरी हैं। पार्टी अब इन कथित टिप्पणियों को "हिंदुस्तान की महिलाओं" की गरिमा पर एक हमले के रूप में पेश कर रही है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि यह मुद्दा उनके आगामी राजनीतिक अभियानों का केंद्र बिंदु रहेगा।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने पालनपुर के चदोटार में आयोजित 'विजय विश्वास सम्मेलन' में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गेनीबेन ठाकोर के खिलाफ एक विवादास्पद टिप्पणी की थी।
विश्वकर्मा ने कहा, "बनास की बहनें उस अपमान को कभी नहीं भूलेंगी जो आपने नारी वंदन अधिनियम के तहत देश की 70 करोड़ महिलाओं पर थोपा है। आने वाले दिनों में हमारी माताएं और बहनें इसका मुंहतोड़ जवाब देंगी और आपके गढ़ से आपकी सीटें और आपकी साड़ी का पल्लू छीन लेंगी।"
33 फीसदी आरक्षण लागू करना चाहती है भाजपा
यह घटना 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक की विफलता के बाद हुई है। सरकार ने 2023 के आरक्षण को तेजी से लागू करने के लिए यह विधेयक पेश किया था, जिसका लक्ष्य 2029 के आम चुनावों तक, नई जनगणना का इंतजार किए बिना, 33% कोटा लागू करना था।
महिला आरक्षण बिल को राहुल गांधी ने 'ट्रोजन हॉर्स' करार दिया
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्ष ने इस विधेयक को 'ट्रोजन हॉर्स' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया यह महिलाओं के अधिकारों को एक बड़े परिसीमन अभ्यास से जोड़ने का छिपा हुआ प्रयास था, जो उत्तरी राज्यों के पक्ष में काम करेगा और दक्षिणी व उत्तर-पूर्वी राज्यों को उनकी सफल जनसंख्या नियंत्रण के लिए दंडित करेगा।
लोकसभा में क्यों नहीं पास हुआ महिला आरक्षण विधेयक
चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन था, इसलिए इसे दो-तिहाई बहुमत (लगभग 352 वोटों) की आवश्यकता थी। हालांकि, विधेयक के पक्ष में 298 मत पड़े और विपक्ष में 230। सरकार को 54 वोटों की कमी का सामना करना पड़ा और विधेयक पारित नहीं हो सका।
इस विधायी गतिरोध का अर्थ है कि 2023 के कानून के बावजूद, वास्तविक 33% महिला आरक्षण 'कानूनी उलझन' में फंसा है, और 2034 तक आरक्षित सीटों पर किसी महिला के बैठने की संभावना नहीं है।












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