Iran War Update: 'Trump पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं', ठुकराया ईरान का प्रपोजल तो बोले अराघची, फिर शुरू होगी जंग?
Iran War Update: United States और Iran के बीच शांति वार्ता तो दूर-दूर तक होते नहीं दिख रही बल्कि तनाव बता रहा है कि दोनों देश युद्ध के मुहाने पर वापस लौट रहे हैं। एक तरफ ट्रंप ईरान में घातक मिसाइलें तैनात कर ईरान को डराने की कोशिश कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ ईरान डरने के बजाय उल्टा ट्रंप को देख लेने जैसी धमकी दे रहा है। ऐसे में जो सीजफायर है वह किसी भी वक्त टूट सकता है। इसलिए जानना जरूरी हो जाता है कि ईरान ने अब ट्रंप को क्या कह दिया है और इसके मायने क्या हैं।
ईरान को क्यों लग रहा दोबारा शुरू होगा युद्ध
ईरान का सैन्य लीडरशिप खुलकर कह रही है कि अमेरिका के साथ टकराव किसी भी समय फिर से शुरू हो सकता है। देश की सशस्त्र सेनाओं ने पूरी संभावना" जताई है कि अमेरिका-इज़राइल की तरफ से ईरान पर दोबारा हमला हो सकता है। यह बयान दिखाता है कि वाशिंगटन की मंशा को लेकर तेहरान में भरोसा लगातार घट रहा है। इससे दोनों देशों के रिश्तों की अस्थिरता भी सामने आती है। इसका बड़ा कारण ईरान में डार्क ईगल मिसाइल की तैनाती और इजरायल को भेजे गए 650 टन हथियार हैं। इसके साथ ही ईरानी विदेश मंत्री ने कह दिया है कि हमें ट्रंप पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं।

ईरानी सेना का अमेरिका पर आरोप
ईरान के सैन्य मुख्यालय के डिप्टी चीफ Mohammad Jafar Asadi ने दावा किया कि हाल की घटनाओं से पता चलता है कि अमेरिका पिछली आपसी समझ का पालन नहीं कर रहा है। असादी के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों के बयान और कदम मीडिया से प्रभावित हैं। उनका कहना है कि अमेरिका का मकसद पहले तेल की कीमतों में गिरावट रोकना है और दूसरा खुद उस गड़बड़ी से बाहर निकलना है, जो उसने खुद पैदा की है।
ईरानी सेना हाई अलर्ट पर
असादी ने कहा कि इस अनिश्चित माहौल में ईरानी सेनाएं लगातार अपनी तैयारी बढ़ा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका कोई नई मूर्खता या दुस्साहस करता है, तो जवाब देने के लिए ईरान पूरी तरह तैयार है। यह बयान बताता है कि ईरान सिर्फ बयानबाजी नहीं कर रहा, बल्कि अपनी सैन्य तैयारी को भी मजबूत दिखाना चाहता है।
ट्रंप ने ईरान का नया प्रस्ताव ठुकराया
तेहरान की इन चेतावनियों के कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के नए वार्ता प्रस्ताव को खारिज कर दिया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह प्रस्ताव अमेरिका की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। ट्रंप ने ईरान की लीडरशिप को बहुत Unstructured और दो या तीन गुटों में बंटा हुआ बताया। जो बात काफी हद तक ठीक भी है। अली खामेनेई की जाने के बाद ईरान की लीडरशिप IRGC, राजनीतिक लीडरशिप और मोजतबा के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
ट्रंप क्यों हिचक रहे?
White House से Florida रवाना होने से पहले ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान सौदा करना चाहता है, लेकिन वह मौजूदा प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि संघर्ष-विराम लागू होने के बाद सक्रिय युद्ध खत्म हो चुका है। ट्रंप का दावा है कि यह युद्ध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। ये बताता है कि ट्रंप भी दोबारा युद्ध शुरू करने से हिचक तो रहे हैं जिसका बड़ा कारण है कि अगर जंग वापस शुरू होती है तो उससे बाहर निकलने का अमेरिका के पास कोई प्लान नहीं है। ऐसे में उसका नुकसान भी बराबर से होगा।
कानूनी पचड़े में फंसे ट्रंप
इसी बीच अमेरिका के अंदर एक बड़ी कानूनी बहस भी चल रही है। ट्रंप ने War Powers Resolution की आलोचना की है। इस कानून के तहत 60 दिनों के भीतर सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है। ट्रंप ने इसे असंवैधानिक बताया। इससे जुड़ी 1 मई की समय-सीमा सांसदों के एक हफ्ते के अवकाश पर जाने के कारण बिना कार्रवाई खत्म होने की उम्मीद है।
युद्ध खत्म या फिर से शुरू?
एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि युद्ध खत्म हो चुका है, दूसरी तरफ ईरान चेतावनी दे रहा है कि जंग कभी भी दोबारा शुरू हो सकती है। यही विरोधाभास अमेरिका-ईरान रिश्तों की असली तस्वीर दिखाता है। दोनों देश फिलहाल पीछे हटते नजर नहीं आ रहे। इसलिए यह तनाव अभी खत्म होने से काफी दूर दिखाई देता है।
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