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फिर बिजनेस में लौट रही हैं लॉबिस्ट नीरा राडिया

Nira Radia back with new firm
दिल्ली (ब्यूरो)। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला और टाटा समूह के अगुवा रतन टाटा के साथ फोन पर बातचीत को लेकर विवादों में आई कारपोरेट लाबिस्ट नीरा राडिया एक साल बाद पुनः अपने बिजनेस में वापस हो रही हैं। पर इस बार वह नई कंपनी के साथ होंगी साथ ही होंगी नई जगह पर। लेकिन जिम्मेदारी वही होगी। सलाहकार की। यानी कारपोरेट के लिए सरकार को प्रभावित करने का काम अभी वह जारी रखेंगी।

एक अखबार के अनुसार, नीरा राडिया अपनी पुरानी कंपनी जिससे वह विवादों में आई थीं उससे भी किनारा कर रही हैं। यानी वैष्णवी कारपोरेट कम्युनिकेशन पर तालाबंदी करने जा रही हैं। बताया जा रहा कि राडिया इसपर अक्टूबर में ताला लगा देंगी। इसकी जगह उन्होंने नई कंपनी बनाई है और उसी कंपनी के द्वारा वह अपना व्यवसाय का संचालन करेंगी। नई कंपनी दिल्ली से दूर गुडगांव में होंगी जहां उन्होंने डीएलएफ कारपोरेट पार्क में 7000 हजार फीट का दफ्तर ले रखा है। वहां करीब 50 कर्मचारी बैठेंगे। कंपनी में मालिकाना हक राडिया का है जिसमें उनका 91 फीसदी शेयर है।

आपको बता दें कि नीरा राडिया पिछले साल सबसे विवादों में रही हैं। विवाद का कारण उनके द्वारा कारपोरेट घरानों के लिए लाबिंग करना था। उन्होंने इसके लिए पत्रकारों को भी साधा साथ ही अधिकारियों और सियासी गलियारों में भी खूब दखल रखा। हालांकि बाद में उन्हें सीबीआई ने भी खूब खंगाला पर कुछ ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। इसी कारण अब राडिया फिर नए अवतार में सामने आने को तैयार हैं।

राडिया का टेप कैसे लीक हुआ पता नहीं

सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि कापरेरेट घरानों के लिए संपर्क का काम करने वाली नीरा राडिया और टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा सहित कई प्रमुख व्यक्तियों के बीच रिकार्ड की गयी टेलीफोन वार्ता के टेप लीक करने वाले स्रोत का पता नहीं लगाया जा सका है।

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष सरकार ने सीलबंद लिफाफे में गोपनीय जांच रिपोर्ट पेश की. न्यायाधीशों ने इसके अवलोकन के बाद कहा कि संक्षेप में रिपोर्ट कहती है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि किस स्रोत ने इसे लीक किया।

न्यायाधीशों ने कहा, ‘इन टेप को लीक करने वाले स्रोत के बारे में वे (सरकार) पता लगाने में विफल रहे हैं.' न्यायाधीशों के अनुसार रिपोर्ट में सरकार ने कहा है कि नियमों के तहत इन टेप की मूल प्रति शीर्ष अदालत के समक्ष पेश करने के बाद सारे टेप नष्ट कर दिये गए हैं।

टेलीफोन टैपिंग की सारी वार्तालाप सार्वजनिक करने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस के वकील प्रशांत भूषण ने इस घटनाक्रम पर अचरज व्यक्त किया है।

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