इंद्र भगवान खफा, हरियाणा भी सूखे की चपेट में

Haryana also facing drought
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य को देश के विकसित राज्यों में गिना जाता है लेकिन बारिश के मामले में इस राज्य की झोली हमेशा खाली ही रहती है। मानसून में बरसात का कम होना यहां आम बात रहती है लेकिन इस बार स्थिती कुछ ज्यादा ही चिंताजनक है। सरकार भी अब मानने लगी है कि मानसून ने इस बार हरियाणा के साथ कुछ ज्यादा ही बेरूखी कर दी है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलेगा कि जहां पहली जून से 31 जुलाई के बीच वर्षा में 72 प्रतिशत तक की कमी के कारण वर्तमान स्थिति चिंताजनक है, वहीं अगले दस दिन और भी महत्वपूर्ण होंगे। मुख्य सचिव पी के चौधरी ने कहा कि यदि अगले दो सप्ताह के दौरान अच्छी वर्षा होती है तो वर्तमान स्थिति में सुधार होगा और धान की फसल का दवाब कम हो जाएगा।

स्थिति की जांच के लिए कमेटी गठित

चौधरी ने प्रदेश में वर्षा की कमी के कारण उत्पन्न स्थिति पर नजर रखने के लिए सचिवों की एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी में राजस्व, सहकारिता, ङ्क्षसचाई, कृषि, बिजली, जन स्वास्थ्य, खाद्य एवं आपूर्ति, ग्रामीण विकास तथा पशुपालन विभागों के प्रशासनिक सचिव शामिल हैं और स्थिति का जायजा लेने के लिए कमेटी की हर सप्ताह बैठक होगी। सचिवों की कमेटी की पहली बैठक मे मुख्य सचिव ने प्रशासनिक सचिवों के साथ मिलकर स्थिति की समीक्षा की।

बाजरे के तहत क्षेत्र को बढ़ाना भी सम्भव हो सकेगा, जिसकी फसल मुख्यत: वर्षा पर निर्भर होती है। बहरहाल, उन्होंने सभी सम्बन्धित विभागों को मानसून की कमी के कारण उत्पन्न हो सकने वाली सम्भावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। विभागों को ऐसी प्रासंगिक योजनाएं तैयार करने के भी निर्देश दिए गये, जो ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक हों।

कमेटी में यह भी पाया कि इस वर्ष कृषि क्षेत्र को 35 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति की गई और इसके कारण बिजली निगमों को वित्तीय दवाब बढ़ा है, क्योंकि बिजली की खरीद उच्च दरों पर की गई। मुख्य सचिव ने बिजली विभाग को वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर कृषि क्षेत्र को पर्याप्त मात्रा में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बिजली विभाग से भारत सरकार के साथ प्रदेश को बिजली का अतिरिक्त आबंटन करने और प्रदेश में हो रहे अतिरिक्त खर्च के मद्देनजर वित्तीय सहायता प्रदान करने का मामले को उठाने पर भी बल दिया।

यमुना में बहाव बढ़ाए भाखड़ा में जल स्तर घटा

सिंचाई विभाग ने बताया कि जहां गत तीन-चार दिनों में यमुना नदी में बहाव बढ़ा है, वहीं भाखड़ा में जल स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है और इसके कारण अगले छ: महीनों में पानी की कमी हो सकती है। इस समय नहर प्रणाली में जल स्तर सामान्य है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जनस्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में समुचित मात्रा में पेयजल की आपूर्ति के लिए आवश्यक कदम उठाए गये हैं।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बिजली विभाग जलघरों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि गांवों के तालाब पानी से भरे रहने चाहिए ताकि मवेशियों के लिए पीने का पानी सुनिश्चित हो सके।

कमेटी ने महसूस किया कि यदि स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो खड़ी फसलें इस हद तक क्षतिग्रस्त हो जाएंगी कि अतिरिक्त राहत उपाय करने होंगे। अत: यह निर्णय लिया गया कि सम्बन्धित विभाग क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के साथ इस पर कड़ी नजर रखेंगे। राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तायुक्त स्थिति के निरीक्षण के लिए नोडल एजेंसी होंगे तथा राजस्व विभाग का नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे कार्य करेगा।

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