अमेरिका मे सूखा, अफ्रीका-भारत के लिये चिंता

अमरीकी मौसम विभाग नेशनल ओसियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) ने कहा है कि 1956 के बाद से ये अब तक का सबसे बड़ा सूखा है। अमरीकी महाद्वीप का 55 प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में है। इस वजह से मक्के और सोयाबीन की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर आग के कारण फसल तबाह हुई है। अमरीका, गेंहू, सोयाबीन और मक्के का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है इसलिए इस सूखे से दुनिया भर में इसका प्रभाव पड़ेगा।
अमेरिका में सूखे का सबसे खराब प्रभाव इथोपिया और सूडान जैसे देशों पर पडेंगा। जहां अमेरिका से मिल रहे मुफ्त अनाज की बदौलत करोड़ों लोग जिंदा हैं। एथोपिया समेत कई अफ्रीकी देशो में पिछले एक दशक से हालात वैसे ही हैं। इसमें खतरा है कि अगर अमेरिका ने सूखे के कारण अनाज की मात्रा घटा दी अफ्रीका में हाहाकार मच जाएगा। दुनिया के तमाम देशों को अब आगे आना पड़ेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका का 80 प्रतिशत हिस्सा सूखा है । 18 राज्यों में मक्के की तीस फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है। "जमीन की ऊपरी सतह सूख गई है, फसल और चारागाह की इतनी खराब स्थिति पिछले 18 वर्षों में कभी नहीं देखी गई । अमरीका के कृषि विभाग के अनुसार 26 राज्यों की 1000 काउंटी यानी स्थानीय निकायों ने सूखे की वजह से आपदा घोषित कर दी है।
मध्य-पश्चिम अमेरिका के इलिनोइस राज्य के किसान कहते हैं कि उन्होंने इससे पहले इतनी सूखी धरती कभी नहीं देखी। मौसम विभाग के मुताबिक अब अगर बारिश हो भी जाए तो नहीं लगता कि फसल बचाई जा सकती है। सूखे की खबर से अमेरिका में पिछले एक महीने में मक्के के दाम 45 फीसदी, गेंहू के 36 फीसदी और सोयाबीन के दाम 17 फीसदी बढ़ गए हैं। जाहिर है इस महंगाई का असर बाकी दुनिया में भी पड़ेगा।
अमेरिका से अनाज आयात करने वाले देशों को महंगे अनाज का आयात करना पडेगा। उनका बजट गड़बड़ा जाएगा। खैरियत है भारत अनाज तो नहीं मंगाता लेकिन सोयाबिन तेल के मामले में वह काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है। इसलिए भारत में तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत के दोनों पड़ोसी चीन औऱ पाकिस्तान अमेरिका के सूखे के कारण बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। इसका अप्रत्यक्ष रुप से असर भारत पर पड़ सकता है।












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