तृणमूल के भय से सरकार ने एक औऱ बिल टाला

Mamata Banerjee
दिल्ली (ब्यूरो)। राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए सरकार ने तृणमूल के साथ बढ़ती तल्खी को और न बढ़ाते हुए उसके दबाव में एक औऱ बिल टाल दिया है। फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) बिल को सरकार आर्थिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण मान रही थी। हाल ही में ममता बनर्जी ने वायदा कारोबार को बढ़ावा देने पर इस बिल का विरोध जताया था। जबकि सरकार कैबिनेट की मंजूरी के बाद बिल को संसद के मॉनसून सत्र में पास करने की तैयारी में थी।

वैसे कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने उम्मीद जताई है कि तृणमूल कांग्रेस की तरफ से जो भी शिकायतें मिली हैं, उन्हें जल्द ही दूर करके कैबिनेट की अगली बैठक में इस बिल को पेश किया जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ साफ ये नहीं कहा कि बिल पेश न करने के पीछे और क्या कारण हैं।

सूत्रों ने बताया कि दिसंबर, 2010 में लोकसभा में पेश यह बिल संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार पीएम को लिखे तृणमूल मुखिया के पत्र की वजह से अंतिम क्षणों में विधेयक कैबिनेट की बैठक में नहीं रखने का फैसला किया गया। बताया जा रहा है कि पत्र में ममता ने प्रधानमंत्री से पेंशन सुधार बिल पर भी आपत्ति जताई थी जिसके कारण सरकार ने उसे भी रोक दिया। ममता के विरोध के कारण ही रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई का प्रस्ताव भी परवान न चढ़ सका। विमानन उद्योग में भी विदेशी निवेश का ममता ने विरोध किया। बताया जा रहा है कि सरकार इस समय ममता से किसी भी मुद्दे पर उलझना नहीं चाहती क्योंकि उसकी कोशिश है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव किसी तरह से सही रूप से संपन्न हो जाए।

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