तृणमूल के भय से सरकार ने एक औऱ बिल टाला

वैसे कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने उम्मीद जताई है कि तृणमूल कांग्रेस की तरफ से जो भी शिकायतें मिली हैं, उन्हें जल्द ही दूर करके कैबिनेट की अगली बैठक में इस बिल को पेश किया जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ साफ ये नहीं कहा कि बिल पेश न करने के पीछे और क्या कारण हैं।
सूत्रों ने बताया कि दिसंबर, 2010 में लोकसभा में पेश यह बिल संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार पीएम को लिखे तृणमूल मुखिया के पत्र की वजह से अंतिम क्षणों में विधेयक कैबिनेट की बैठक में नहीं रखने का फैसला किया गया। बताया जा रहा है कि पत्र में ममता ने प्रधानमंत्री से पेंशन सुधार बिल पर भी आपत्ति जताई थी जिसके कारण सरकार ने उसे भी रोक दिया। ममता के विरोध के कारण ही रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई का प्रस्ताव भी परवान न चढ़ सका। विमानन उद्योग में भी विदेशी निवेश का ममता ने विरोध किया। बताया जा रहा है कि सरकार इस समय ममता से किसी भी मुद्दे पर उलझना नहीं चाहती क्योंकि उसकी कोशिश है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव किसी तरह से सही रूप से संपन्न हो जाए।












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