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दिल्ली की महिलाएं मर्जी हो तो पहने हेलमेट

Delhi's women get helmets freedom
दिल्ली (ब्यूरो)। राजधानी में महिलाओं को एक और आजादी मिली है, हालांकि यह आजादी विवादस्पद है। सरकार ने महिलाओं को दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने से मुक्ति दे दी है। अब महिलाओं पर निर्भर है वे चाहे तो अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट लगाएं या आकर्षक दिखने के लिए चाहे तो इसे न लगाएं।

दिल्ली सरकार हेलमेट संबंधित पुराने कानून में कोई परिवर्तन नहीं करेगी। यह फैसला सरकार ने इसलिए किया है क्योंकि सिख संगठनों ने अनिवार्यता को धर्म के विरुद्ध बताकर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से विरोध जताया था। इस फैसले की जानकारी परिवहन विभाग दिल्ली हाईकोर्ट को देगा। मोटर वाहन अधिनियम में राज्य सरकार को किसी एक श्रेणी के लिए हेलमेट पहनने में छूट देने का अधिकार दिया गया है।

अदालत में मामला पहुंचने के बाद यह कोशिश भी की गई कि सिर्फ सिख महिलाओं को छूट देने का नियम बना दिया जाए। लेकिन ट्रैफिक पुलिस का तर्क था सिख और गैर सिख महिला में फर्क कैसे मुमकिन है। इसलिए सभी के लिए हेलमेट पहनने की वैकल्पिक व्यवस्था को जारी रखा जाएगा। दिल्ली सरकार पर न्यायालय की अवमानना का मामला न चले इसे देखते हुए ही सरकारी पक्ष कोर्ट में रखा जाएगा।

यहां बता दैं दिल्ली हाईकोर्ट में एक व्यक्ति ने महिलाओं के लिए हेलमेट की अनिवार्यता लागू करने के लिए जनहित याचिका दाखिल की थी। इस पर अदालत ने 25 अप्रैल तक सरकार को फैसला लेने के लिए कहा था। सिख संगठनों ने इसे धर्म के खिलाफ बताया था। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सिख संगठनों से मुलाकात के बाद परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली से मामले पर चर्चा की थी। सरकार ने कानून के जानकारों से संपर्क किया। कानून के जानकारों ने बताया कि कोर्ट ने अनिवार्यता लागू करने के लिए नहीं कहा है, बल्कि मामले में पक्ष रखने के लिए दो महीने का समय दिया है। 15 जून को समय समाप्त हो चुका है, लेकिन सरकार ने पक्ष नहीं रखा। उसे देखते हुए जनहित याचिका दाखिल करने वाले व्यक्ति ने कोर्ट की अवमानना की याचिका दाखिल कर दी।

इससे पहले दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया था कि उसने मोटर वाहन नियमों में संशोधन करने का फैसला किया है ताकि दो पहिया वाहनों की पिछली सीट पर बैठने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उनके लिए हेलमेट पहनना आवश्यक बनाया जाए।

सरकार द्वारा हाईकोर्ट को महिला सुरक्षा के लिये दिल्ली मोटर वाहन नियम 1993 में संशोधन के इरादे को बताये जाने के बाद कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ए के सिकरी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय इंडला ने सरकार से कहा था कि वह दो महीने के अंदर संशोधन करे और महिला सवारों के लिये हेलमेट पहनना अनिवार्य बनाने के लिए दाखिल की गई याचिका का निपटारा कर दिया। अब सरकार ने फैसला किया है कि महिलाओं के हेलमेट जरुरी नहीं है।

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