केंद्र ने यूपी पर की धनवर्षा, दिये 50 हजार करोड़

सूत्र बता रहे हैं कि केंद्र सरकार अखिलेश सरकार को कम से कम 50 हजार करोड़ की योजना को हरी झंड़ी दे दी है जिससे वे कई योजनाएं शामिल हैं जिसके लिए सपा पहले ही गुहार लगाती रही है। यानी कांग्रेस ने अपना एक नया साथी ढूंढ लिया है जिसके सहारे अब वह 2014 की वैतरणी पार करना चाहती है।
मायावती ने मांगा था 80 करोड़
मायावती सरकार केंद्र से 80 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा था पर उन्हें यह पैकेज नहीं मिला पर अखिलेश सरकार ने महज तीन घंटे में 50 हजार करोड़ से अधिक की मदद के लिए हां करवा ली। यही नहीं, आगे चलकर बाकी के लिए भी वादा करा लिया। वैसे यूपी ने केंद्र के समक्ष 93000 करोड़ रुपये पैकेज देने की मांगें रखी थी।
बीते पांच साल के इतिहास में मंगलवार को यह पहला मौका था, जब केंद्र और अखिलेश सरकार के लगभग दो दर्जन अफसरों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में तीन घंटे तक सिर्फ उत्तर प्रदेश के विकास के लिए खजाना खोलने के रास्तों पर माथापच्ची की। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पुलक चटर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन की मौजूदगी में हुई इस बैठक में तमाम योजनाओं और कार्यक्रमों में केंद्रीय सहायता के लिए हरी झंडी मिल गई।
क्या है परियोजनाएं
यूपी सरकार के ही एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र ने जिन योजनाओं पर सहमति जतायी है उसमें राज्य से गुजरने वाले 7,818 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ 3,150 करोड़ रुपये की लागत से राज्य में नौ विश्वविद्यालय खोलने तथा कृत्रिम भूमिगत जल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 15,000 करोड़ रुपये की मांग भी शामिल है। इसके अतिरिक्त राज्य के किसानों के लिए उर्वरकों की आपूर्ति, खाद्य अनाज भंडारण के विस्तार के लिए अनुदान और वित्तीय संकट से जूझ रहे विद्युत निगमों को आर्थिक मजबूती देने की मांग भी शामिल है।
पीएमओ से कहा, विश्व बैंक से भी दिलाएं मदद
मुख्यमंत्री ने पीएमओ के माध्यम से विश्व बैंक से 5,000 करोड़ रुपये के क्लीन टेक्नोलॉजी फंड को भी मंजूरी दिलाने की मांग की गई। सपा की सरकार केंद्रीय मार्ग निधि से 2,5000 करोड़ और अंतर्राज्यीय सम्पर्क परियोजना से 1,000 करोड़ रुपये भी चाहती है।












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