रेलवे के अंडरवर्ल्‍ड में गैंग्‍स ऑफ 'तत्‍कालपुर' का राज

Gang hacks IRCTC website and books Tatkal tickets
रेलवे के तत्काल टिकट में जिस तरह दलालों की दबंगई जारी है, उससे तो फिल्मी नाम 'गैंग्स ऑफ तत्काल पुर', हकीकत में तब्दील हो गया है। राजधानी दिल्ली में भी तत्काल टिकट के दलालों का गिरोह सक्रिय है। आलम यह है कि आधी रात से लाइन में लगने के बावजूद लोगों को टिकट नहीं मिल रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी रेल तंत्र का यह हाल ऐसा इसलिये है क्‍योंकि जितना बड़ा रेल नेटवर्क है, उससे कहीं बड़ा दलाल नेटवर्क। जी हां रेल का टिकट नेटवर्क कितना भी बड़ा और मजबूत क्‍यों ना हो तत्‍काल टिकटों के दलाल उसे तोड़ना खूब जानते हैं।

ज्‍यादा दूर की बात ना करते हुए अभी पिछले हफ्ते की ही बात करें तो यूपी पुलिस की एसटीएफ शाखा ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश कर इस बात का खुलासा किया था। एटीएस ने आईआरसीटीसी की वेबसाइट को हैक कर तत्काल रेल टिकटों में खेल करने वाले गिरोह के 3 सदस्‍यों सलमान अहमद, सुभाष तिवारी और सीताराम निषाद को गिरफ्तार किया था। सलमान अहमद इस गिरोह का मुखिया था और आईआरसीटीसी की वेबसाइट को हैक कर 5 मिनट में 15 टिकट बुक किया करता था।

गिरफ्तार गिरोह के तीनों सदस्यों ने एसटीएफ के सामने कई अहम राज उगले हैं। एसटीएफ इस रैकेट के तार को मुंबई, चेन्‍नई, अहमदाबाद, पुणे, बैंगलोर और दिल्ली में भी खंगालने की कोशिश कर रही है। एसटीएफ सॉफ्टवेयर ईजाद करने वाले मास्टर माइंड कुलवीर सिंह को अरेस्ट करने के लिए अहमदाबाद पुलिस के संपर्क में है। तो आईए फिर इस पूरे प्रकरण पर विस्‍तार से चर्चा करते हैं कि यह गिरोह किस तरह से तत्‍काल टिकट में तत्‍काल फेरबदल कर काला कारोबार किया कराता था।

आईआरसीटीसी की वेबसाइट कर लेते थे हैक

गिरोह के मुखिया सलमान अहमद ने इस मामले में कई सनसनीखेज खुलासे किए। उसने इस खेल में आईटी हब पुणे, अहमदाबाद, बैंगलोर और मुंबई के कई संपर्कों को जानकारी दी। सलमान ने बताया कि इल्लीगल सॉफ्टवेयर सी सिस्टम के जरिए वे आईआरसीटीसी की वेबसाइट को हैक कर लेते थे। उसने बताया कि इसके जरिए उसका गिरोह दो या तीन मिनट में ही वेबसाइट से कई टिकट बुक कर लेते थे जबकि काउंटर पर एक टिकट बुक करने में ही दो या तीन मिनट लग जाते हैं।

अभियुक्तों ने बताया कि अहमदाबाद के कुलवीर सिंह इन्हें इंटरनेट के जरिये सॉफ्टवेयर को 10 हजार रुपए मासिक लेकर मुहैया करवाता था। सलमान ने बताया कि इस तरह का सॉफ्टवेयर मुंबई, पुणे और अहमदबाद जैसे शहरों से लैपटॉप पर लोड किया जाता है। इन्हीं के जरिए तत्काल रेल टिकटों को निकाला जाता है। इस तरह से यह गिरोह न सिर्फ रेलवे को चूना लगा रहा था बल्कि जरूरतमंद लोगों से ज्यादा पैसे वसूल रहा था। मालूम हो कि इस तरह के सॉफ्टवेयर पहले भी पकड़े जा चुके हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कुलवीर सिंह आईटी प्रफेशनल है और उसी ने इस सॉफ्टवेयर को बनाया है।

यह तो बात रही यूपी की राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार इस गिरोह के खुलासे की। मगर अभी 6 दिन पहले दिल्ली पुलिस ने रेलवे टिकट की कालाबाजारी के आरोप में दो जालसाजों देवेंद्र और नागेश को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप है कि इन दोनों ने सांसदों के जाली लेटरहेड छपवा लिए थे। इन लेटरहेड्स की मदद से ये टिकट कन्फर्म करवा लेते और आम लोगों को टिकट बेचकर उनसे मोटी रकम ऐंठते थे। बाद में पुलिस ने सांसद की शिकायत पर जांच शुरू की तो इनका गड़बड़झाला सामने आ गया।

तत्‍काल टिकट में दलालों का खेल और टिकट खिड़की पर टी 20 का खेल

तत्‍काल टिकट में दलालों के खेल की बात तो आपको समझ में आ गई होगी मगर टिकट खिड़की पर टी 20 का खेल आप नहीं समझ पाये होंगे। तो आईए हम आपको इस बारे में विस्‍तार से समझाते हैं। दरअसल दिल्‍ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्‍टेशन पर टिकट लेने आये कुछ लोगों से जब हमने बात की तो पूरा मामला पानी की तरह साफ हो गया। स्‍टेशन पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि लाइन में आगे से 10 लोग दलाल होते हैं जो पहले ही ज्‍यादा टिकट ले लेते हैं और फिर उन्‍हें मुंह मांगी कीमत में बेचते हैं।

उनका मनना है कि वो टिकट इस कदर खरीदते हैं जैसे मानों क्रिकेट का टी 20 मैच चल रहा हो। वहीं दूसरी तरफ यूपी एटीएसा ने भी इस बात का खुलासा किया था कि टिकट के काले कारोबारी रेलवे सिस्‍टम से कहीं ज्‍यादा तेज टिकट बुक करते हैं और उन्‍हें एजेंटों के माध्‍यम से मर्जी के दाम पर बेचते हैं।

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