...खोपड़ी प्याला और मुर्दा निवाला

Aghoris
श्‍मशान यानी कि जिंदगी का अ‍ाखिरी पड़ाव। ऐसा पड़ाव जहां आने के बाद दुनिया की तमाम चीजे बेमांग हो जाती हैं। मगर जिंदगी के इसी आखिरी पड़ाव पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मूर्दों को नोचकर उनमें जिंदगी तलाशते हैं। जी हां उनके लिये इंसानी खोपड़ी शराब पीने का प्‍याला बन जाता है और मूर्दा निवाला। श्‍मशान बिस्‍तर बन जाती है और चिता चादर। फिर जरा सोचिए कि वो मंजर क्‍या होगा? जब दुनिया सोती है तब वो जागते हैं। उनकी अलग ही मायावी दुनिया है। तो आज हम ऐसे लोगों की जिंदगी से पर्दा उठाएंगे जो मूर्दों से जिंदगी उधार लेते हैं और उनकी खुद की जिंदगी सदियों से रहस्‍य के पर्दे में है।

हम बात कर रहे हैं श्‍मशान की साधाना में इंसानी चोलों को उतारकर फेंक देने वाले अघोरियों की। ये अघोरी भी इंसानी जमात का एक हिस्‍सा हैं जो मूर्दों में भगवान ढूंढते हैं। खास बात यह है कि ये इंसानी खोपड़ी का सौदा करते हैं। अघोरी जो कुछ भी खाते हैं या पीते हैं वो सिर्फ इंसानी खोपड़ी में। खास बात यह है कि ये जूर्म करके भी ये कानून की लंबी पकड़ से कोसो दूर हैं। पुलिस को उनके इस घिनौनी करतूत का पता होता है मगर अक्‍सर वह शिकायत करने वालों का इंतजार ही करती रह जाती है।

अघोरी करते हैं इंसानी खोपड़ी का काला कारोबार

कहते हैं कि इंसानी खोपड़ी से खतरनाक कुछ भी नहीं होता मगर तभी तक जबतक खोपड़ी काम कर रही हो। मगर श्‍मशान में अपना बसेरा बनाने वाले अघोरियों के लिये मूर्दे की खोपड़ी भी लाखों की होती है। काफी जद्दोज‍हद के बाद गंगा किनारे घूमने वाले एक अघोरी ने बताया कि उसने अबतक लाखों इंसानी खोपड़ी बेचे हैं। उसका कहना है कि शहरों में रहने वाले कई करोबारी इसका सौदा करते हैं। उसने बताया कि मैं इस काम को बचपन से कर रहा हूं और बहुत बड़े-बड़े लोगों से मेरी पहचान हो चुकी है।

अब आईए आपको इस अघोरी के बारे में बताते हैं। इसका नाम राम सिंह हैं और वह कानून का एक भगोड़ा मुजरिम हैं। उसके उपर पत्‍नी की हत्‍या का आरोप है। उसे जिंदा अपनों में रहने के सिवा मूर्दों के बीच रहना इसलिये अच्‍छा लगता है क्‍योंकि मूर्दों की ना तो अपनी कोई पुलिस होती है और ना ही कोई खुफिया तंत्र।

अघोरी का रूप लेकर कानून से बचते हैं शातिर मुजरिम

मूर्दों के बीच मंडराते अघोरी दुनिया के किसी भी बुराई को बुरा नहीं कहते। अघोरियों के बारे में लोगों को जितनी जानकारी हैं उससे कहीं ज्‍यादा अफवाह। शायद यहीं कारण है कि मौजूदा समय में मुजरिम अघोरी का रूप लेकर कानून को चकमा दे रहे हैं। लाज़मी है कि जब जीना है तो खाना और पीना भी है। इसलिये वो अधर्म जाल में फांसकर लोगों से इंसानी खोपड़ी का सौदा करते हैं। ये खुद को इसकदर ढाल चुके होते हैं कि इनके तक पहुंचना सबके बूते की बात नहीं होती।

उन्‍हें इंसानों की तरह और इंसानों के बीच रहना पसंद नहीं होता। उनकी अलग दुनिया होती है जिसमें वो दावा करते हैं कि वह एक स्‍थान पर बैठे दूसरे स्‍थान पर देख सकते हैं। इतना ही नहीं उनका दावा यह भी होता है कि उनके बुलाने पर आत्‍मा भी दौड़ी चली आती है। यह तो रहा अघोरियों और अपराधियों के बीच का कनेक्‍शन मगर क्‍या आपने कभी किसी अघोरी को देखा है? अगर हां तो आप अपने विचार नीचे लिखे कमेंट बाक्‍स में दर्ज करा सकते हैं।

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