प्रणब पर नहीं बन पा रही लेफ्ट में सहमति

वाम के पास कुल 51 हजार वोट हैं जो कांग्रेस के लिए मुफीद साबित हो सकते हैं। वैसे, प्रणब मुखर्जी ने भी अपने लिए समर्थन जुटाने की मुहिम के तहत बुधवार को माकपा महासचिव प्रकाश करात का दरवाजा खटखटाया। साथ ही उन्होंने तृणमूल का भी समर्थन मांगा। प्रणब के तृणमूल नेताओं को फोन करने से जहां तृणमूल में बवाल मचा हुआ है वहीं प्रणब के मुद्दे पर वाम दलों में सहमति नहीं है। वाम दल इस बात को नहीं पचा पा रहे हैं कि यह वहीं प्रणब हैं जो पिछले चुनाव में हमें बंगाल की खाड़ी में फेंकने की बात करते थे।
वाम दल के नेता अंजुम ने कहा कि हम लोग प्रणब की मुखालफत करेंगे। अपनी बात रखेंगे पर यदि पार्टी कोई भी निर्णय करती हैं तो हमलोग इसका सम्मान करेंगे। उधर, तृणमूल भी प्रणब को गोलमोल जवाब देकर विरोध मोल नहीं लेना चाहती इसलिए उसके कुछ नेताओं ने कहा कि हमलोग संगमा का समर्थन नहीं करने जा रहे हैं इसलिए आपके मुद्दे पर हमारे यहां मंथन चल रहा है। पर दीदी जैसा कहेंगी वैसा ही होगा। पर दीदी मानने वालों में से नहीं हैं। वहीं वामदलों की बैठक और संगमा को लेकर भाजपा का धुव्रीकरण के बीच प्रणब ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की।
इस मुलाकात में उन्होंने मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विचार विमर्श किया। राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से संगमा के इस्तीफे के बाद अब प्रणब की सर्वसम्मति से रायसीना हिल्स पहुंचने की उम्मीद लगभग समाप्त है। मुख्य विपक्षी खेमे राजग में संगमा के नाम पर मतभेद हैं, लेकिन भाजपा व उसके सहयोगियों का साथ मिलने के बाद उनके पास ठीक-ठाक वोट हो गए हैं। वैसे तो संप्रग के पास जीतने के लिए पर्याप्त वोट हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने संगमा का समर्थन न करने का एलान कर प्रणब की राह और आसान कर दी है।












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