राष्‍ट्रपति चुनाव: किरणमय नंदा ने पलट दिये यूपीए के समीकरण

Somnath Chatterjee, Manmohan Singh and Abdul Kalam
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के मुलाकात ने कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। इस परेशानी के कारण कांग्रेस के नेताओं के घर अब बैठकें शुरू हो गई है जहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के घर पर प्रणब और एंटनी पहुंचे हुए हैं वहीं कुछ अन्य कांग्रेसी नेताओं के यहां इस समय बैठकें चल रही हैं। पर आपको बता है कि इस परेशानी और समीकरण के पीछे कौन हैं। शायद आपको लग रहा होगा कि इस परेशानी के पीछे ममता औऱ मुलायम हैं। तो आप गलत है इस परेशानी के पीछे सपा के किरणमय नंदा है जिन्होंने ममता और मुलायम के बीच बैठक के सूत्रधार बने। सूत्र बता रहे हैं कि किरण मय नंदा ने ही इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया और दिल्ली से कोलकाता एक कर ऐसा रोड मैप बनाया जिससे पूरी सियासत ही पलट गई।

कांग्रेस की कोशिश थी कि सपा और ममता के बीच खाई खींच दी जाए जिससे दोनों दल कभी भी एक दूसरे के साथ खड़े न होने पाए। हालांकि कांग्रेस ने कोशिश भी की और मीडिया ने भी उस बात को खास तवज्जो दी जिसमें संसद के बजट सत्र के बाद प्रधानमंत्री के आवास पर दिए रात्रि भोज में जहां तृणमूल को तवज्जो नहीं दी गई वहीं सपा को आंखों का तारा बनाकर पेश किया गया। मीडिया ने भी इस बात को इतना तूल दिया कि लगा कि संप्रग के सहयोगी के रूप में सपा उभर रही है जबकि खिचड़ी कहीं और पक रही थी।

सूत्र बता रहे हैं कि सपा नेता किरण मय नंदा इस मुहिम पर एक महीने से लगे हुए थे जब से प्रणब दादा का नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में उभरा था। हालांकि इसे धार देने की कोशिश की थी एक तृणमूल कांग्रेस के ही नेता ने। उसने इस बात को उभारा कि प्रणब के नाम पर दीदी कभी नहीं मानेंगी क्योंकि दीदी और दादा में शुरू से ही रंजिश है। और दादा की रंजिश के कारण ही दीदी को कांग्रेस भी छोड़ना पड़ा था। आपको याद होगा 1984 का चुनाव जिसमें दादा ने दीदी को उभरने तक नहीं दिया था इसलिए ये दोनों नेता इस ताक में थे कि कब प्रणब दादा को कांग्रेस अपने पाले का उम्मीदवार घोषित करती है और कब ये दोनों नेता अपना बदला चुकता करते हैं।

और हुआ भी वहीं। ममता ने मौका देखकर कांग्रेस के बाल पर ऐसा चौका मारा कि दादा मैदान से बाहर हो गए। हालांकि कांग्रेस अभी भी अडिग है कि वह दादा को ही मैदान में उतारेगी पर कांग्रेस समेत किसी के पास भी जीत हासिल करने के लिए आंकड़ा नहीं है। कांग्रेस जहां एक नंबर पर है वहीं भाजपा और अन्य दल दूसरे और तीसरे नंबर पर। पर यदि कलाम का नाम पर सहमति बनी तो भाजपा और तृणमूल तथा सपा कलाम को राष्ट्रपति बनाने के लिए काफी होंगे।

जीत का जादुई आंकड़ा

संप्रग के पास कुल 4,59,483 वोट हैं, पर तृणमूल कांग्रेस के बिदक जाने से यह आंकड़ा घटकर 4,13,558 रह जाता है। यानी उसे 1,36,442 मतों का और जुगाड़ करना होगा। आंकड़ों के इस खेल में संप्रग के लिए उम्मीद का आसरा होगा गैर-कांग्रेस एवं गैर भाजपा दल। इस खेमे के पास कुल 2,63, 824 मत हैं और इसमें सपा के 66,688 मतों को घटा दिया जाए तो 1,97,136 वोट फिर भी इस कुनबे के पास होंगे। हालांकि हर नए साथी के पास अपने समर्थन की कीमत होगी और इसका फैसला संप्रग को करना होगा कि वो किस मांग के बदले मतों का आंकड़ा जुटाती है।

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