भोपाल में रियल लाइफ में हुआ 'ब्‍याह हमारी बहू का'

wedding
आपने फिल्मो या डेली सोप में देखा होगा जब फिल्म का हीरो या फिर डेली सोप का मेन लीड मर जाता है तो उसकी मां अपनी नयी नवेली बहू की शादी कहीं और कर देते हुए कहती है। जिसको जाना था वो तो चला गया अब जवान बहू की ज़िन्दगी क्यों बर्बाद की जाये। इसको भी अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक़ है। लेकिन अगर ऐसा ही कुछ वास्तविकता में हो तो एक आम आदमी के लिए इस बात को पचा पाना जरा मुश्किल होता है।

इससे पहले हम आपको बताते चलें की आजकल एक निजी टीवी चैनल की करें तो उस पर एक विज्ञापन खूब देखने को मिल रहा है एक विज्ञापन है एक नए आने वाले धारावाहिक है इस धारावाहिक का नाम है 'ब्‍याह हमारी बहू का'। जहाँ सिनेमा के पर्दे और टीवी सीरियल में ऐसा होना अगल बात है और असल जिन्‍दगी में ऐसा होना बिल्‍कुल ही अलग बात।

लेकिन असंभव सा लगने वाला यह किस्‍सा एक सास ने उस समय सच कर दिखाया जब उन्‍होंने अपने बेटे की मौत के बाद बहू का कन्‍यादान खुद अपने हाथों किया। यह बात सुनने में अजीब लग सकती है मगर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐसा ही कुछ हुआ है। बेटे की मौत के बाद एक महिला ने अपनी बहू का पुनर्विवाह कराया और खुद कन्यादान भी किया।

जहाँ सास ने बहू को बेटी की तरह दुल्हन बनाकर रविवार को टीटी नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में कन्यादान कर विदा किया। इसके पूर्व सादे समारोह में शादी की रस्में हुईं।आपको बताते चलें की होशंगाबाद के कृष्णापुरी निवासी क्षत्रिय गुजराती परिवार की सविता बेन चावरा पर दो साल पहले दुखों का पहाड़ उस समय टूटा, जब हार्ट अटैक ने उनके बेटे मनोज को उनसे हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया।

बहू सुषमा की मांग सूनी हो गयी और उसके जीवन की खुशियों मेन अचानक असमय लग गया जो सविता बेन को ज्यादा दुख पहुंचा रहा था। वे जानती थीं कि अकेले जीवन काटना कितना मुश्किल होता है। उन्होंने सुषमा को हमेशा बेटी ही माना।

वे उसका घर दोबारा बसाने का मन बना चुकीं थी। घर और परिवार में स्थितियां सामान्य होने पर उन्होंने सुषमा को बेटी के रूप में घर से विदा करने की इच्छा सभी के सामने रखी। उनके इस फैसले का किसी ने भी विरोध नहीं किया। सुषमा भी अपनी मां समान सास के फैसले का विरोध नहीं कर सकीं। आखिरकार उन्होंने भी शादी के लिए अपनी हामी भर दी।

इस पूरे मामले पर सविता का कहना है कि उनके लिए सुषमा बहू नहीं, बेटी है। साथ ही वह कहती हैं कि जब सास, बहू को बहू मानती है तो बहू भी सास को सास का दर्जा देती है, अगर मां का दर्जा चाहिए तो बहू को बेटी मानना होगा।

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