डिंपल के सामने अब सिर्फ दो निर्दलीय, 9 जून को होगी जीत की घोषणा

हालांकि कन्नौज में इन दोनों नेताओं का रसूख इस प्रकार की नहीं है कि ये दोनों लोग मिलकर भी डिंपल को पराजित कर सकें पर इनके हटने से इतना तो तय है कि डिंपल के नाम से एक नया रिकार्ड बन जाएगा कि वे भी लोकसभा में निर्विरोध जीतकर आईं है। वैसे डिंपल की जीत कन्नौज में 100 फीसदी पक्की है। बताया जा रहा है कि सभी पार्टियों ने अपनी एक रणनीति के तहत डिंपल को वाक ओवर दिया है। बसपा ने जहां यह कहते हुए प्रत्याशी उतारने से इन्कार कर दिया कि प्रदेश में अराजक स्थिति है और वह प्रदेश सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पूरा मौका देना चाहती है। वहीं कांग्रेस संप्रग सरकार को समर्थन दे रही सपा के मुखिया मुलायम सिंह की पुत्रवधू के खिलाफ प्रत्याशी न उतारने की घोषणा ममता को बडबोलेपर से रोकने के लिए है।
हालांकि भाजपा ने अनमने मन से कोशिश की पर यह कोशिश सिर्फ अपना चेहरा ढकने के लिए है क्योंकि उसने अपना प्रत्याशी तो उतारा पर वह नामांकन नहीं कर पाया। भाजपा इसके लिए सपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहरा रही है कि वह सपा द्वार दो स्थानों पर रोके जाने के कारण उसका प्रत्याशी नामांकन नहीं कर पाया। अब देखना है कि इस मामले में चुनाव आयोग क्या निर्णय करता है यदि चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में फैसला करता है तो फिर डिंपल को चुनाव लड़ना ही पड़ेगा। वैसे इसकी गुंजाइश कम ही है। यदि ऐसा हुआ तो डिंपल को 9 जून को ही जीत का प्रमाण पत्र मिल जाएगा और उनकी जीत की घोषणा कर दी जाएगी।












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