पीएम ईमानदार हैं तो करवाएं मंत्रियों की जांच: बेदी

Team Anna member Kiran Bedi
चंडीगढ़। टीम अन्ना की मुख्य सदस्य डॉ. किरण बेदी ने केंद्र की यूपीए सरकार को एक बार फिर से कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है किअगर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व सोनिया गांधी सही मायने में भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं तो वह अपनी केबिनेट के मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरापों की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के माध्यम से करवाएं।

किरण बेदी आज यहां पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स में आर्यन ग्रुप ऑफ कालेज के छठे स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि टीम अन्ना ने हाल ही में केंद्रीय कैबीनेट के14 मंत्रियों की सूची प्रधानमंत्री को सौंपी है। जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इसके बावजूद सरकार ने अभी तक इस मामले में अपनी स्थिति को स्पष्ट नहीं किया है।

उन्होंने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों तथा वरिष्ठ पत्रकारों के एक संयुक्त आयोग से करवाने की मांग करते हुए कहा कि अगर 25 जुलाई तक प्रधानमंत्री व सोनिया गांधी ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं की तो टीम अन्ना एक बार फिर से सरकार के खिलाफ देशव्यापी अनशन शुरू कर देगी। इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके बाद नौ अगस्त को योग गुरू रामदेव के नेतृत्व में क्रांति दिवस मनाया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि टीम अन्ना में किसी प्रकार का मतभेद नहीं है। अरविंद केजरीवाल समेत सभी सदस्य इस मामले में एकजुट हैं। टीम अन्ना की मुहिम को सफल कराने का श्रेय मीडिया को देते हुए उन्होंने कहा कि योग गुरू स्वामी रामदेव लंबे समय से काले धन के मुद्दे पर लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि टीम अन्ना जनलोकपाल बिल के मुद्दे को उठा रही है। यह दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इन्हें अलग करके नहीं देखना चाहिए।

किरण बेदी ने कोल घोटाले के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि अगर सरकार इस मामले को लेकर वास्तव में गंभीर है तो कोल घोटाले की जांच के लिए जल्द से जल्द आयोग का गठन करके जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि कोल खदानों का आंवटन कथित तौर पर उन लोगों को किया गया है जिनका कपड़े व सीमेंट का कारोबार था।

इस मामले में सरकार की निगरानी पूरी तरह से शून्य रही है। सरकार की मिलीभगत से कोल खदानों का आवंटन कुछ चहेतों को किया गया है। जिससे देश में करोड़ों-अरबों रुपए का घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में काम करने वाली जांच एजेंसियां पूरी तरह से निषपक्ष नहीं हैं। विपक्ष में रहते हुए सभी राजनीतिक दल इस बात पर अपनी सहमती जताते हैं। सत्ता में आने के बाद कोई भी दल इस मामले में बदलाव नहीं करता है। इसलिए जनलाकपाल में ऐसे प्रावधान रखे जा रहे हैं जिससे सीबीआई व अन्य एजेंसियों को जांच में स्वतंत्रता मिल सके।

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