डिंपल यादव के खिलाफ क्या है भाजपा, कांग्रेस, बसपा की प्लानिंग?

कांग्रेस की मजबूरी
यह दूसरा मौका है, जब डिंपल यादव सपा उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा उपचुनाव में मैदान में उतरने जा रही हैं। इसके पहले 2009 में भी डिंपल ने पति अखिलेश द्वारा ही छोड़ी गई फिरोजाबाद संसदीय सीट से उपचुनाव लड़ा था, लेकिन डिंपल को कांग्रेस उम्मीदवार राजबब्बर के हाथों पराजित होना पड़ा था। इस बार मुलायम सिंह से बढ़ी नजदीकियां कांग्रेस को प्रत्याशी उतारने से रोक रही हैं। खैर यह जरूरी भी है, क्योंकि ममता बनर्जी की प्रलय से अगर यूपीए को बचा सकता है तो वो सिर्फ मुलायम हैं।
माया पहले ही पीछे हट चुकी हैं
सूत्रों का कहना है कि बसपा यहां चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती भी इस बाबत संकेत दे चुकी हैं। भाजपा के एक सूत्र ने बताया कि पार्टी कन्नौज उपचुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी। हालांकि प्रत्याशी कौन होगा इसके बारे में आज रात आपको पता चल जाएगा। वहीं बसपा के एक पदाधिकार ने बताया कि पार्टी ने अभी तक कन्नौज लोकसभा उपचुनाव के लिए प्रत्याशी नहीं तय किया है। सारा दारोमदार बसपा प्रमुख मायावती पर है।
भाजपा भी सीट छोड़ने के मूड में
यूपी में इस समय चर्चा गर्म है कि भाजपा भी डिंपल के लिए मैदान छोड़ने जा रही है। नामांकन की आखिरी तारीख बुधवार 6 जून है और मंगलवार शाम तक भाजपा का प्रत्याशी तय नहीं हो सका है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा को सीएम की पत्नी से के खिलाफ मैदान में उतरने लायक प्रत्याशी भाजपा को नहीं मिल रहा है।
अब अगर अन्य पार्टियों की बात करें तो फिलहाल मुलायम के गढ़ में भाजपा, बसपा और कांग्रेस के अलावा किसी भी अन्य पार्टी में अभी इतना दम नहीं है कि सपा के प्रत्याशी को हरा सके। वैसे भी डिंपल यादव सिर्फ एक प्रत्याशी नही हैं बल्कि कन्नौज की बहूरानी भी हैं।












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