यूपी के रायबरेली में बनेगा एम्स अस्‍पताल

All India Medical Science Institute (AIIMS)
रायबरेली। लम्बे इंतजार व बहस के बाद आखिरकार एम्स के लिए चयन किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिए जाने की बात कहने के बाद भी केन्द्र सरकार ने एम्स के लिए रायबरेली को चुना। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण केन्द्र ने रायबरेली को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के लिए सबसे उपयुक्त ठहराया।

केन्द्र द्वारा एम्स के लिए रायबरेली का चयन किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने रायबरेली जिले में ही दो स्थानों पर जमीन की उपलब्धता का ब्यौरा देते हुए अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। वर्ष 2007 में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में एम्स की स्थापना की घोषणा की थी। सरेनी विधान सभा क्षेत्र के लालगंज कस्बे के आसपास एम्स की स्थापना के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध राज्य सरकार से उसी वक्त किया था, लेकिन तत्कालीन बसपा सरकार ने रायबरेली संसदीय क्षेत्र में ही एम्स की स्थापना को लेकर कड़ा एतराज जताया और दो साल तक प्रस्ताव को ठंडे बस्ते मे डाले रखा।

केन्द्रीय स्वास्थय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने वर्ष 2010 में बाकायदा जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया था लेकिन बसपा सरकार ने जमीन उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाते हुए एम्स की स्थापना में रोड़े अटकाये। उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही केन्द्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनने का फायदा अब रायबरेली वासियों को मिलता दिख रहा है।

राज्य सरकार की मंशा भांप राजस्व विभाग के अधिकारियों ने एम्स के लिए एक नहीं बल्कि दो-दो स्थानों पर भूमि उपलब्ध होने का न सिर्फ दावा किया बल्कि जमीन का पूरा ब्यौरा भी भेज दिया। उपजिलाधिकारी आर.के. तिवारी ने सालभर से बन्द पडी शहर से सटी दरियापुर चीनी मिल की 98.7 एकड़ जमीन का कागजात भेजा है जबकि लालगंज के उपजिलाधिकारी ने बन्नामऊ गांव की 56 एकड़ जमीन ग्रामसभा की तथा किसानों की 60 एकड़ बंजर जमीन की सहमति राज्य सरकार को भेजी है।

श्री तिवारी के मुताबिक एम्स के लिये लगभग 110 एकड़ जमीन की मांग की गयी है जिसमें दरियापुर चीनी मिल में 4.5 एकड़ में प्रशासनिक व आवासीय क्षेत्र सोलह एकड में फैक्ट्री एरिया तथा शेष जमीन फार्म हाउस के रूप में मौजूद है। यह जमीन सरकार के अधीन भी है जिसके हस्तांतरण में कोई व्यावधान नहीं है। लालगंज के बन्नामऊ गांव में किसानों से जमीन खरीदनी पड़ेगी।

ऐसे में लोगों का मानना है कि शहर से सटी दरियापुर चीनी मिल की जमीन ही एम्स के लिए उपयुक्त है। इलाहाबाद-लखनऊ राजमार्ग के समीप व रेलवे सुविधा होने से माना जा रहा है कि ए स दरियापुर चीनी मिल में ही खुलेगा। जिलाधिकारी जी. श्रीनिवासुलु ने भी एम्स के लिए जमीन उपलब्ध होने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि प्रस्ताव केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा जा चुका है। उम्मीद जतायी जा रही है कि इस बारे में आगे के निर्देश जल्द ही आ जाएंगे।

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