भाजपा के लिए नरेंद्र मोदी से बढ़कर कुछ नहीं

आर्थिक राजधानी में शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जाने से पहले हम आपको फ्लैशबैक में ले चलते हैं। यूपी विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान मोदी के नहीं आने पर संजय निरूपम ने मोदी पर गुस्सा व्यक्त किया था, जबकि मोदी के प्रचार में नहीं आने के कई बड़े कारण थे। लिहाजा मोदी ने उस समय तो कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर कर दिया।
मोदी ने कहा कि अगर संजय निरूपम वहां रहेंगे तो वो नहीं आयेंगे। गुजरात के सर्वांगीण विकास से पार्टी की छवि कितनी ऊपर उठी है, यह बात भाजपा अच्छी तरह जानती है, लिहाजा पार्टी के पदाधिकारियों के दबाव में संजय जोशी को इस्तीफा देना पड़ा। और उसी के तुरंत बाद मोदी ने कहा वो कार्यकारिणी में आयेंगे। पार्टी नेताओं का कहना है कि पार्टी में कोई आंतरिक कलह नहीं है।
गडकरी की दूसरी पारी
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की गुरुवार से दूसरी पारी तब शुरू हुई जब राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उन्हें दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। सच पूछिए तो गडकरी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। इनमें सबसे बड़ी चुनौती 2014 का लोकसभा चुनाव है। हालांकि गडकरी को पूरा विश्वास है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व में भाजपा इस बार फिर से सत्ता में आयेगी।
मोदी को मनाना जरूरी क्यों?
गुजरात का पिछले 9 सालों में विकास किसी से नहीं छिपा है। यह बात भाजपा अच्छी तरह जानती है कि मोदी ही हैं, जो भाजपा को एक बार फिर राष्ट्रीय सत्ता दिला सकते हैं। लिहाजा हर डगर पर उन्हें मनाना जरूरी होता है। सच पूछिए तो भाजपा शासित राज्यों में सबसे आगे गुजरात ही चल रहा है। यही नहीं मोदी को नंबर-1 सीएम का खिताब भी दिया गया था। और तो और विदेशों में भी मोदी की चर्चा व्यापक रूप से है। मोदी को टाइम पत्रिका ने कवर पेज पर प्रकाशित कर विकास पुरुष करार दिया था।












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