यूपी में गर्मी से बुरा हाल, पानी की किल्लत शुरू

पीने की पानी की किल्लत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोग सूखे पड़े नदी नालों, कुओं और तालाबों को खोदकर गंदा पानी पीने
को मजबूर है। शहरी क्षेत्रों में पीने के पानी में गंदगी होने के कारण शहर में पीलिया, आंत्रशोध और दूसरी बीमारियां फैलने का डर है। यहां आदमी तो आदमी पशु पक्षी भी पानी के लिए भटक रहे हैं।
इन विकास खण्डों का शायद ही कोई गांव बचा हो जहां जल संकट नहीं हो। स्थिति यह है कि सरकारी स्तर पर लगे हैंडपम्प तक पानी नहीं दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि गांव में हैण्ड पम्प लगवाने के लिए खण्ड विकास अधिकारी तथा जल निगम को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कुछ नहीं किया जा रहा है।
हालत यह है कि 1994 में यहां जल प्रदाय विभाग का गठन हुआ थ। पहले लालडिग्गी के वाटर वक्र्स में टांडा जलाशय में एकत्र जल का शोधन करके पेयजल वितरित किया जाता है। उस समय शहर की आबादी 25 से तीस हजार के करीब थी लेकिन जनसंख्या अब पांच लाख तक पहुंच चुकी है और इसके हिसाब से पेयजल की व्यवस्था नहीं हुई।
लंबे समय के बाद जलकूपों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं जलप्रदाय विभाग 40 मिलियन लीटर पानी रोज देने का दावा करता है लेकिन जल निगम के प्रमुख अभियंता नगर के लिये प्रतिदिन 60 मिलियन लीटर पानी की जरुरत बताते हैं। वहीं पाइप लाइनों की खस्ता हालत से पानी भी प्रदूषित हो रहा है।












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