आखिर कब खत्‍म होगा ये अंधा कानून?

आखिर कब खत्‍म होगा ये अंधा कानून?
अंकुर कुमार श्रीवास्‍तव

यूपी में सपा सरकार आने और अखिलेश यादव के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद सूबे की खाकी ने कानून को जूते की नोक पर रख दिया है। यूपी में खाकी पर एक बार फिर दाग लगा है। दाग है एक लाश के अपमान का। अमरोहा में सारी हदें पार करते हुए एक इंस्पेक्टर ने बुलेट का निशान देखने के लिए बूट से पलट दी लाश वो भी सूबे की एसपी की आंखों के सामने। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस सफाई में उतर गई है लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि कब खत्म होगा यूपी का ये अंधा कानून?

एक तरफ बेलगाम खाकी और दूसरी तरफ आला अफसरों के विवादास्‍पद बयान ने यह साफ कर दिया है कि यूपी में कानून व्‍यवस्‍था किस कदर बिगड़ी हुई है। ज्‍यादा दूर ना जाते हुए आपको पिछले माह की एक वाक्‍या बता दें। शायद आपको याद भी होगा कि सहारनपुर के डीआईजी एसके माथुर ने एक फरियादी को झूठी शान के नाम पर हत्‍या कर देने के लिये उकसाया था। मामला यह था कि थाने पर पहुंचे फरियादी ने पुलिस को बताया कि उनकी लड़की किसी के साथ भाग गई ह‍ै। उतने में औचक निरीक्षण पर आये माथुर का सामना फरियादी से हो गया।

माथुर ने कहा कि अगर मेरी बेटी या बहन किसी के साथ भाग जाती तो मैं उसे गोली मार देते या खुद जान दे देता। इतना ही नहीं उसके बाद संतकबीर नगर के एसपी ने जो बयान दिया उसने तो यूपी सरकार की सक्रियता पर ही सवाल उठा दिये। संतकबीर नगर के एसपी धर्मेंद्र कुमार व्‍यापारियों के संग मीटिंग कर रहे थे। इतने में लड़कियों के लापता होने की चर्चा शुरु हो गई। धर्मेंन्‍द्र कुमार ने कहा कि इलाके में लड़कियों के भागने की घटना बढ़ गई है तो ऐसे में पुलिस चोर पकड़े या लड़कियों को।

ये तो महज चंद बाते हैं वरना यूपी में ऐसी घटनाओं की भरमार है जो सालों से खाकी को शर्मसार कर रहा है। अब लखनऊ के अलीगंज थाने के एक सिपाही को ही ली लिजीए। वर्ष 2010 में थाने के एक सिपाही ने 6 साल के बच्‍चे की बेरहमी से पीटाई की थी। इस मामले ने तूल पकड़ा मगर कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2009 में बाराबंकी के एक थाने में फरियादी की र‍हस्‍यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। और सबसे दागदार घटना तो तब हुई जब इसी साल इटावा के एक थाने में 6 साल की बच्‍ची को सिर्फ इस बात पर बेरहमी से पीटा गया क्‍योंकि उसने मात्र 280 रुपये चुराये थे।

साल तो बदलते गये मगर खाकी का चेहरा नहीं बदला और अमरोहा में एक बार फिर खाकी को शर्मसार होना पड़ा। ऐसा नहीं कि ये सारी बाते सूबे के मुखिया अखिलेश यादव को पता नहीं हैं। अखिलेश यादव ने पुलिस के साथ कानून व्‍वस्‍था पर बैठक की है और जनता से 15 दिन का समय मांगा है। मगर अमरोहा में शव को बूट से पलटने के बाद सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि मौके पर पहुंची पुलिस और जांच टीम का जरुरी सामान कहां है? ग्‍लोव, कैमरा और मैग्निफाइंग ग्‍लास के बिना पुलिस जांच कैसे कर लेती है? अमरोहा में जो हुआ क्‍या वो शव का अपमान नहीं था या फिर इस हरकत से मानवाधिकार का उल्‍लंघन नहीं हुआ? इन सवालों के जवाब हम आपसे चाहते हैं। आप अपना जवाब नीचे दिये कमेंट बाक्‍स में लिख सकते हैं।

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