'लिंग परिक्षण' के लिये सात समंदर पार से आ रहे हैं मेडिक‍ल किट

Infant Baby
दिल्‍ली। सत्‍यमेव जयते कार्यक्रम के माध्‍यम से आमिर खान ने कन्‍या भ्रूण हत्‍या पर रोकथाम के लिये एक अलख जगाई है। मगर आज भी कोख में लिंग की जांच कराने का सिलसिला बदस्‍तूर जारी है। आमिर खान ने अपने शो में जब डॉक्‍टरों से बात की तो पता चला कि गरीब तबके से कहीं ज्‍यादा संभ्रात लोग भ्रूण जांच कराने के दोषी पाये गये हैं।

शिक्षित वर्ग के बीच लड़के और लड़की को लेकर अभी भी मतभेद है। खैर आमिर खान के शो का असर हुआ और अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लिंग परीक्षण न कराने की नसीहत दे दी गई। कुछ जगहों पर छापेमारी भी की गई और कईयों को गिरफ्तार भी किया गया। मगर आमिर की तरफ शुरु किये गये मुहिम का असर कुछ धनाड्य लोगों पर नहीं पड़ा और उन लोगों ने सात समंदर पार से ‘लिंग परीक्षण’ कराना शुरू कर दिया है।

ये विदेशों में आसानी से मिल रही सेक्स डिटरमिनेशन किट को अपने परिचितों से मंगा रहे हैं। यही नहीं किट ऑनलाइन भी खरीदी जा रही है। अभी भी एक लड़के के लिए जाने कितनी लड़कियों का कोख में ही कत्ल हो रहा है। ‘सेव गर्ल’ कैंपेन चला रही स्मृति संस्था और फोग्सी ने विदेशों से चल रहे ‘लिंग परीक्षण’ के कारोबार पर रोक के लिए सख्त कानून बनाने की मांग उठाई है। कनाडा सहित विदेशों में लड़का और लड़की में भेदभाव न होने के चलते गर्भधारण के सात सप्ताह बाद ही लिंग परीक्षण कराया जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने सेक्स डिटरमिनेशन किट बनाई है।

फोग्सी के पूर्व अध्यक्ष डा नरेन्द्र मल्होत्रा ने बताया कि गर्भधारण के सात सप्ताह बाद गर्भवती महिला के ब्लड के सैंपल लिये जाते हैं। इससे पता लग जाता है कि गर्भ में पल रहा शिशु मेल है या फीमेल। पिछले कुछ सालों से पंजाब में किट की मांग एकदम से बढ़ी है। इंटरनेशनल मार्केट में किट की कीमत 25 से 30 यूएस डॉलर है। फेडरेशन आफ आब्सटेक्ट्रिक्स एंड गायनकोलोजी सोसाइटी ऑफ इंडिया (फोग्सी) ने इसका विरोध किया। इसके बाद चोरी छिपे अपने परिचितों से किट मंगाकर ‘लिंग परीक्षण’ होने लगा। यहां तक कि ऑनलाइन भी किट मंगाई जा रही है। मेट्रो शहरों के साथ छोटे शहरों में भी किट की मांग बढ़ती जा रही है। फीमेल शिशु होने पर दवाओं से प्रेगनेंसी टर्मिनेट की जा रही है।

ऐसे काम करती है किट

आईसीओजी की सचिव डा. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि मेल में एक्स, वाई और फीमेल में एक्स, एक्स क्रोमोजोम होते हैं। सात सप्ताह के गर्भस्थ शिशु के ब्लड की कुछ ड्राप गर्भवती महिला के ब्लड में पहुंच जाती है। सेंसटिव किट से गर्भवती महिला के ब्लड के सैंपल से क्रोमोजोम्स का पता लग जाता है। एक्स एक्स होने पर लड़की और एक्स वाई होने पर लड़का डिक्लेयर किया जाता है। कंपनी 98 प्रतिशत सही रिजल्ट का दावा करती हैं। अल्ट्रासाउंड के साथ ही सेक्स डिटरमिनेशन किट से लिंग परीक्षण किया जा रहा है। इसके चलते लिंग अनुपात गड़बड़ाने लगा है। स्मृति संस्था के साथ मिलकर किट के इस्तेमाल की रोकथाम को सख्त कानून बनाने की मांग की गई है।

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