हज सब्सिडी खत्म होने से खुश हुई सउदी अरब सरकार

दुनिया के किसी भी देश में हज यात्रियों को सब्सिडी नहीं दी जाती। कोई मुस्लिम देश यहां तक कि सऊदी अरब से जैसे कट्टर मुसलिम देश में भी सब्सिडी की व्यवस्था नहीं है। भारत में वोट बैक के कारण यह सब जारी रहा। यहां के कुछ मुस्लिम नेता इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। लेकिन उनकी आवाज वोट बैंक के प्रवाह में दब जाती थी। आम मुसलमान भी नहीं जानता है कि हज पर सब्सिडी उसके मजहब के खिलाफ है।
कुछ साल पहले सऊदी अरब सरकार ने भारत से अनुरोध किया था कि वह हज पर किसी प्रकार की छूट बंद कर दे। क्योंकि यह गैरइस्लामिक है। इस्लामिक नियम के मुताबिक हज अपने पैसे से करने की बात कही गई है। सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं कि तो पिछले महीने सऊदी सरकार ने फिर भारत सरकार को आगाह किया। तब विदेश मंत्री कृष्णा ने कहा था कि भारत सरकार इस पर विचार कर रही है।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार की मुसीबत खत्म हो गई। सऊदी अरब सरकार के अनुरोध को अमली जामा पहना दिया गया। दूसरी ओर वोट बैंक के खतरे को कोर्ट के आदेश के नाम पर बचने का उपाय मिल गया।
गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में केंद्र की हज सब्सिडी की नीति को खारिज कर दिया था। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह दस साल के भीतर इस व्यवस्था को खत्म कर दे। जस्टिस आफताब आलम और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने कुरान का जिक्र भी किया जिसमें लिखा है जो खर्च उठा सकें, उन्हीं को हज यात्रा पर जाना चाहिए।
खैरियत की बात रही कि ज्यादातर मुस्लिम विद्वानों ने कोर्ट के फैसले को सराहा है। शिया धर्मगुरु आगा रूही ‘हज किसी भी मुसलमान का निजी मामला होता है। हज के लिए किसी से कोई रियायत या सब्सिडी लेना भीख मांगने के बराबर है। जामा मसजिद के शाही इमाम अब्दुल बुखारी ने भी इसे सही ठहराया है।












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