बॉर्डर पर चीनी सैनिकों से मोबाइल मांग कर कॉल करते हैं भारतीय जवान

माना जा रहा है कि यदि ऐसा ही होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब चीनी सैनिक भारतीयों की हर हलचल पर निगाह रख सकेंगे साथ ही देश में बजने वाला चीनी मोबाइल की घंटी देश के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है।
देश में हर हाथ में मोबाइल है। हर जगह इंटरनेट पर देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक इन सेवाओं से अंजान हैं। चाहे वह नाथूला दर्रा हो या फिर उत्तराखंड या फिर जम्मूकश्मीर का सटा चीनी इलाका यहां पर देश का नेटवर्क काम नहीं करता। जिससे भारतीय सैनिकों को अपने घर बात करने में दिक्कत होती है। अंजान पहाड़ अनजाने लोग और एक मायूसी। इस बीच सैनिक चाहते हैं कि वे भी अपने परिजनों के संपर्क में रहें पर साधन नहीं है।
इस कारण वे सीमाओं पर तैनात अपने समकक्षों से मदद लेते हैं। वे अपने समकक्ष सैनिकों की मोबाइल से अपने घरों में फोन करते हैं क्योंकि चीनी सीमा पर नेटवर्क का जाल है और इस कारण चीनी सैनिकों का मोबाइल सीमा पर बेहतर तरीके से काम करता है। हालांकि यह फोन केवल भाईचारे के नाम पर होता है पर सैनिक हमेशा अपने परिवार से बात करते समय भावुक हो जाते हैं औऱ सीमा पर हो रही सभी हलचलों को परिवार के सभी सदस्यों को जता देते हैं जिससे सीमाओं पर चल रही गतिविधि के बारे में चीन को बिना मशक्कत जानकारी मिल जाती है।
सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय की स्थायी समिति के सदस्यों के इस खुलासे के बाद तो सरकार को सतर्क तो नहीं हुई है पर संसदीय समिति जरूर इस बात से दुखी है कि देश के सैनिकों को चीनी सैनिकों से मदद लेनी पड़ती है वह भी फोन करने के लिए। आपको बता दें कि सीमाओं पर नेटवर्क प्रदान करने की जिम्मेदारी बीएसएनएल की है पर वह इस काम में सबसे पिछड़ा है। हालांकि बीएसएनएल के अधिकारी इस बाबत सारा दोष सरकार पर मढ़ते हैं और कहते हैं कि शिविरों के पास टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने के लिए सरकार से सामान खरीदने की गुजारिश की गई थी पर सरकार ने चार साल से कोई खरीदारी नहीं की गई तो इसमें बीएसएनएल का क्या दोष है। गौरतलब है कि नाथूला सिक्किम के पूर्वी जिले में आता है और चीन और भारत के बीच खुले व्यापार सीमा की यहां पोस्ट है। यहां एक समझौत के तहत चीन के साथ व्यापार होता है।












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