गर्मी कम होने से रास्ते में अटक सकता है मानसून

उत्तर पाकिस्तान और उसके आसपास बने पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के कराण उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 1-3 डि.से. ऊपर चलने वाले तापमान के सामान्य से 2-3 डि.से. नीचे तक आ गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि लगभग एक सप्ताह तक बादल छाए रहेंगे, कुछ इलाके में हल्की बारिश भी हो सकती है। इससे तापमान 40-41 डि.से. के आसपास ही रहेगा। दिल्ली में अधिकतम तापमान 40 डि.से. दर्ज किया गया। भले ही दिल्ली वालों को इससे राहत मिल रही हो कि तापमान कम है लेकिन इससे मानसून की रफ्तार कमजोर पड़ जाएगी। तापमान ज्यादा बढ़ने पर ही मानसून की तेज होगी। अगर गर्मी ज्यादा नहीं पड़ेगी तो मानसून की रफ्तार थम जाएगी और दिल्ली वालों को मानसून के लिए कुछ और इंतजार करना पड़ता है।
पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले तीन दिन में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश होने की संभावना है। विभाग के अनुसार 8-9 मई को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी चलने की संभावना है। वैसे वैज्ञानिकों ने घोषणा की है पिछले तीन सालों की तरह इस बार भी मानसून सामान्य ही रहेगा। आज भी देश की 60 प्रतिशत उपजाऊ जमीन जून से सितंबर के बीच हुई बारिश पर ही निर्भर है। अर्थव्यवस्था में मानसून की अहमियत का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य से कम मानसून की एक भविष्यवाणी से अक्सर सेंसेक्स धड़ाम हो जाया करता है।
यहां बता दें 2009 में सूखे का सामना करना पड़ा था। उस साल मध्य प्रशांत सागर के गर्माने से मानसूनी वर्षा प्रभावित हुई थी। उसके बाद के सालों में वर्षा सामान्य रही। इसमें ला.नीना की महत्वपूर्ण भूमिका रही । जो कि मध्य प्रशांत सागर को ठंडा रखती है ।राष्ट्रीय जलवायु केन्द्र के निदेशक और प्रमुख मानसून भविष्यवक्ता डी. शिवनंदा ने मुताबिक भारत में अच्छी वर्षा से संबंध रखने वाला कमजोर ला.नीना करीब करीब खत्म होने को है और वैज्ञानिकों को लगता है कि पूरे मानसून सत्र के दौरान परिस्थितियां अप्रभावित रहेंगी। अमूमन एक जून के आस-पास केरल तट पर पहुंचने से मानसून की शुरुआत होती है। अगले एक सप्ताह तक यह दक्षिण भारत के क्षेत्रों को अपनी जद में लेता है। जून के तीसरे सप्ताह में दिल्ली पहुंच जाता है। लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के कारण मामला गड़बड़ा सकता है।












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