अब रिहायशी इलाकों नहीं चल सकेंगे नर्सिग होम

नोएडा के आवासीय क्षेत्रों में करीब 90 क्लीनिक और 50 नर्सिग होम हैं। इन नर्सिग होमों के खिलाफ प्राधिकरण सीलिंग के लिए स्वतंत्र होगा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह निर्देश डॉक्टरों का पक्ष सुनने के बाद के बाद जारी किया गया। कोर्ट के आदेश के बाद अब रिहायशी इलाकों में स्थित क्लीनिकों में जीवन रक्षक उपकरण और मशीनें रखी जा सकती हैं लेकिन आवास का 25 प्रतिशत हिस्सा ही इसके उपयोग में लाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने चिकित्सकों को एक बैड रखने की इजाजत भी दी है।
गौरतलब है कि आवास का 25 प्रतिशत हिस्सा वकीलों व आर्किटेक्ट भी अपने पेशे के लिए उपयोग में ला सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट यह बात अपने
पांच दिस बर के फैसले में भी स्पष्ट कर चुका है जिसमें रिहायशी इलाकों से कमर्शियल गतिविधियां हटाने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने 5 दिस बर, 2011 को नोएडा के रिहायशी इलाकों में बैंक, गेस्ट हाउस, नर्सिग होम तथा अन्य व्यावसायिक सेवाएं चलाने पर रोक लगाने और दो माह के अंदर उन्हें स्थानांतरित करने का फैसला दिया था। उसके बाद भारतीय स्टेट बैंक सहित 19 बैंकों ने अपने प्रतिष्ठान आवासीय क्षेत्रों से स्थानांतरित करने लिए समय बढ़ाने की मांग की थी।
बेंच ने आवासीय क्षेत्र से नर्सिग होम को पूरी तरह हटाने का अधिकार प्राधिकरण को सौंप दिया है जबकि बैंकों के मसले पर सुनवाई को दस जुलाई तक के लिए टालते हुए अदालत ने प्राधिकरण को एक सप्ताह में उन्हें योजना के तहत प्लॉट आवंटित करने को कहा है। बैंकों का
कहना है कि छह हजार से भी अधिक लॉकर ग्राहक और डेढ़ लाख के करीब खाताधारक इस आदेश से प्रभावित हो रहे हैं।












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