पगार तो मिली नहीं करा दिया मौत से सामना

तीस हजारी अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पवन जैन ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों और गवाहों से स्पष्ट है कि दोनों आरोपियों ने इंसानियत को शर्मसार किया है। पूरी रात दोनों बच्चों को पीटा गया, बल्कि सिगरेट से बच्चों के शरीर के कई हिस्सों को जलाया भी गया। हैरत की बात है कि उनकी राक्षसी प्रवृत्ति यहीं नहीं रुकी। दोनों आरोपी भाइयों ने मिलकर बच्चों को पानी से भरे टब में डालकर इलेक्ट्रिक शॉक भी दिया।
मेडिकल रिपोर्ट से भी स्पष्ट है कि 12 वर्षीय आलम के शरीर पर कुल 43 घाव थे, जिसमें से एक बेहद गंभीर था। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोषी सफीक और मोहम्मद शाहब को पांच-पांच वर्ष की कैद व 61-61 हजार रुपये जुर्माना चुकाने के आदेश दिए हैं। जुर्माने की रकम में से 70 हजार 12 वर्षीय पीड़ित नाबालिग और 30 हजार रुपये 15 वर्षीय नाबालिग बच्चे को देने के आदेश दिए गए हैं। यहां बता दें 12 वर्षीय शमशेर पुरानी दिल्ली के मीना बाजार स्थित सफीक की दुकान में काम करता था। शमशेर को प्रति माह पांच सौ रुपये मिलते थे। एक दिन शमशेर ने बीते तीन माह की पगार देने के लिए कहा। जिसके बाद 17 अक्तूबर-2007 को मालिक ने उस पर 50 हजार रुपये चोरी का आरोप लगा कर रात भर मारपीट की। जब शमशेर का बड़ा भाई जिसकी उम्र 15 वर्ष थी वह अपने भाई को देखने आया तो उसे भी बंद कर उसके साथ भी जुल्म ढाया गया।











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