अलग-अलग रास्‍तों पर निकले अन्‍ना-रामदेव, लेकिन मकसद एक

Yoga guru Baba Ramdev and Anna Hazare
मुंबई। महाराष्ट्र में सशक्त लोकायुक्त बनाने के लिए अन्ना हजारे और छत्‍तीसगढ़ में चल रही लूटखसोट पर लगाम कसने व काला धन के खिलाफ बाबा रामदेव एक महीने तक चलने वाली राज्यव्यापी यात्राओं पर निकल पड़े।

अन्ना की यात्रा शाम करीब चार बजे शुरू हुई। अन्‍ना ने यात्रा से ठीक पहले मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनका यह आंदोलन राज्‍य में लोकायुक्‍त नियुक्‍त करने की मांग को लेकर है। यह यात्रा देश के लिए एक लोकपाल की जंग का एक अंग है। अन्‍ना से जब पूछा गया कि टीम अन्‍ना के सदस्‍य यहां नहीं हैं, तो जवाब मिला कि यह यात्रा राज्‍य व्‍यापी है, लिहाजा उनकी जरूरत नहीं।

अन्‍ना ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ लोकायुक्‍त के लिए नहीं बल्कि राइट टू रिजेक्‍ट को लाने के लिए भी है। इस मौके पर उन्‍होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर राहुल को पीने के पानी की समस्‍या को करीब से देखना है तो वो रालेगण आयें।

ज्ञात हो कि बीते महीने अन्ना ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को पत्र लिखकर राज्य में सशक्त लोकायुक्त कानून बनाने की मांग की थी और ऐसा नहीं होने पर जनांदोलन की चेतावनी दी थी। अन्ना के पत्र में कहा गया था, जब आप मुख्यमंत्री बने थे तो हमने सोचा कि आप भ्रष्टाचार खत्म करने के मकसद से कड़े कानून बनाएंगे। लेकिन हमारी उम्मीदों के उलट राज्य में तो भ्रष्टाचार में इजाफा ही हुआ है।

बाबा रामदेव की स्‍वाभिमान यात्रा

अन्‍ना की इस यात्रा के समानांतर योग गुरु बाबा रामदेव ने अपनी स्‍वाभिमान यात्रा छत्‍तीसगढ़ से शुरू की। उन्‍होंने यात्रा से ठीक पहले कहा कि उनका आंदोलन बाबा रामदेव से अलग है, लेकिन दोनों का मकसद एक है। दोनों ही देश के लिए लड़ रहे हैं। वो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ और मैं देश की संपत्ति के गलत इस्‍तेमाल व लूट-खसोट के खिलाफ।

बाबा रामदेव ने कहा कि उनकी यात्रा की शुरुआत छत्‍तीसगढ़ से करने के पीछे भी एक बड़ा कारण है। वो यह कि देश की अरबों रुपए की भू-संपत्ति, खनिज, आदि छत्‍तीसगढ़ में है और देश के कुछ चंद लोग इसका गलत इस्‍तेमाल कर निजी लाभ उठा रहे हैं। आम आदमी को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सच पूछिए तो देश के प्रत्‍येक नागरिक, हर शहरी, हर ग्रामीण, प्रत्‍येक जनजातीय व्‍यक्ति का हक इस भू-संपत्ति पर है। और वो यह हक दिलाकर रहेंगे।

हम आपको बता दें कि दोनों की यात्रा अगले एक महीने तक चलेगी और उसके बाद तीन जून को बाबा और अन्‍ना दोनों जंतर-मंतर पर मिलेंगे। वहां केंद्र सरकार के खिलाफ एक दिन का अनशन होगा।

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