मऊ में चली घंटो मुठभेड़, इंस्पेक्टर शहीद

उनके कब्जे से बंधक बनाये गये बच्चों को छुड़ा लिया गया है। मारे गये बदमाशों की पहचान गाजीपुर जखनिया के धीरत सिंह प गोरखपुर के विकास के रूप में की गई है। धीरज गाजीपुर का कुख्यात अपराधी है और उसके सिर पर 15 हजार रूपये का ईनाम घोषित था।
प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने मुठभेड़ में शहीद इंस्पेक्टर के परिजनों को दस लाख रपए की आर्थिक सहायता के साथ अन्य सुविधाओं की घोषणा की है, जबकि बदमाशों की गोली से मारे गये मकान मालिक गुप्ता के परिजनों को भी समुचित सहायता दी जायेगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार एसओजी प्रभारी रामनरेश यादव व सर्विलांस प्रभारी एसके शुक्ला को दिन में मुखबिर से सूचना मिली कि सूमो सवार बदमाश किसी बड़ी घटना को अंजाम देने जा रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों बदमाशों के इलाके में होने की जानकारी होने पर पुलिस ने उनका पीछा किया , मगर वे मटिया कोट गांव के रामजी गुप्ता के घर में घुसे और उनके हाथ में असलहा देखकर रामजी की पत्नी व बेटी घर से भाग निकले लेकिन दो बच्चे व गृहस्वामी अंदर फंसे। रामजी ने विरोध किया तो उन्हें गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। अब दोनों बच्चों को ढाल बनाकर उन्होंने पुलिस टीम पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
एसओजी टीम ने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को देते हुए खुद पोजीशन ले लिया और जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। इसी टीम में शामिल शहर कोतवाल गोविंद सिंह रामजी के मकान में 30 मीटर दूर स्थित एक मंदिर के पास लोकेशन ले रहे थे कि बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलिया चलाना शुरू कर दिया। गोली लगते ही कोतवाल गिर पड़े। पुलिसकर्मी उनको जिला अस्पताल ले गए जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
अब गोली रूक रूक कर चलती रही, पुलिस भी रूक रूक कर जवाबी फायरिंग करती रही। इस बीच एक बदमाश का धैर्य जवाब दे दिया और मकान से बाहर निकल आया जिसके कारण वह मारा गया। कुछ समय बाद से मकान के अंदर से हलचल आना बंद हो गयी थी। जब अंदर जाकर देखा गया तो दूसरा बदमाश मृत पड़ा हुआ था और दोनो बच्चें सुरक्षित थे।












Click it and Unblock the Notifications