वेश्यावृत्ति से मुक्त हुईं युवतियां कहीं भी रहने को आजाद

देह व्यापार में जबरन धकेली गईं युवतियों के पुनर्वास की कोई योजना है या नहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली महिला आयोग को इसकी जानकारी ही नहीं है। दोनों आयोग ने जीबी रोड से मुक्त कराई युवतियों के पुनर्वास के मुद्दे पर हाईकोर्ट में कहा कि वे पता कर ही बता सकते हैं कि पुनर्वास की योजना है या नहीं। इस पर हाईकोर्ट नाराजगी जताते हुए निर्मल छाया में रखी गईं 15 युवतियों को रिहा करते हुए कहा वे अपनी इच्छानुसार कहीं भी रहने को स्वतंत्र हैं।
न्यायमूर्ति एस.रविंद्र भट्ट और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ के समक्ष पेश दोनों आयोग के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे निर्मल छाया में रखी गई 15 युवतियों से मिली हैं और सभी ने अपने गृह नगर आंध्र प्रदेश जाने से इनकार कर दिया है। युवतियां वापस जीबी रोड कोठे पर ही जाना चाहती हैं।
उन्होंने तर्क रख दिया कि आयोग इन युवतियों का पुनर्वास करना चाहती है। अदालत ने पुनर्वास योजना के बारे में पूछा तो तो वे असमर्थ हो गई। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी नहीं है। पता लगाकर बता सकते हैं कि कोई पुनर्वास योजना है या नहीं। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा आप पुनर्वास की बात कर रहे हैं, मगर आपको कोई जानकारी ही नहीं है।
खंडपीठ ने कहा इन 15 युवतियों को जबरन निर्मल छाया में रखा गया है और मजिस्ट्रेट का ऐसा फैसला गैरकानूनी है। खंडपीठ ने सभी 15 युवतियों को तुरंत रिहा करने का निर्देश देते हुए कहा वे अपनी इच्छानुसार कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं। दरअसल इन युवतियों ने याचिका दायर कर जबरन बंधक बनाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने आंध्र प्रदेश पुलिस से मिलकर फरवरी में 72 युवतियों को कोठे से रिहा करवाया था। 55 युवतियों को अदालत ने छोड़ दिया था जबकि 15 निर्मल छाया में भेज दी गई थी।












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