घर से नहीं निकले दिल्ली वाले, हुआ 52 फीसदी मतदान

शुरूआती खबरों के मुताबिक मतदान 52 फीसदी के करीब हुआ है। कुछ इलाकों में चुनाव का बहिष्कार किया गया। यह तो और भी दुखद है। बहिष्कार से तो हम कुछ भी नहीं कर सकते । कम से कम जो ईमानदार है उसे वोट देकर हम हालात बदल सकते हैं। हालांकि यह तय है कि इस बार कांग्रेस और भाजपा में करीबी मुकाबला है। मतगणना मंगलवार को होगी।
तीन भागों में विभाजित दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के लिए रविवार को हुए मतदान का कई इलाकों में मतदाताओं ने बहिष्कार किया। विरोध का कारण इलाकों में सुविधाओं का कथित अभाव था। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, उत्तरी दिल्ली के लाडपुर और सनोठ तथा बाहरी दिल्ली के काजीपुर गांव लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया।
सुबह आठ बजे मतदान शुरू हुआ, लेकिन मतदान केंद्र खाली रहे। निर्वाचन अधिकारी लोगों का इंतजार करते रहे, लेकिन लोग मतदान केंद्रों के बाहर एक-दूसरे से बातें करते रहे। उन्होंने अंदर आकर मतदान नहीं किया।
काजीपुर गांव के लोगों कहना था कि क्षेत्र में 1,280 मतदाता हैं और 10 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। हमने तय किया है कि हम इस बार किसी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे, क्योंकि पिछले कई साल से हमारे क्षेत्र में कुछ भी विकास नहीं हुआ है। हमारे पास अब भी कोई प्राथमिक
चिकित्सालय या अन्य नागरिक सुविधाएं नहीं हैं।
वहीं, लाडपुर इलाके में बहिष्हकार करने वालों का कहना था कि हमने इस बार मतदान के बहिष्कार का फैसला किया, ताकि प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकृष्ट कर सकें, जो अन्यथा हमारी समस्याओं के प्रति कान बंद किए रहता है।
दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए रविवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान की शुरुआत धीमी रही और दोपहर तीन बजे तक राजधानी के कुल 1.15 करोड़ मतदाताओं में से करीब 40 प्रतिशत ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।
कुछ लोगों ने शिकायत की कि उन्हें इसलिए मतदान केंद्रों में नहीं जाने दिया गया क्योंकि उनके पास राज्य निर्वाचन आयोग का पत्र नहीं था। राजधानी में 83 हजार पुलिसकर्मी मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में लगे हैं। दिल्ली नगर निगम के तीन निकायों पूर्वी, दक्षिण और उत्तरी के 272 वार्डों के लिए 2,423 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। हालांकि मुसलिम बहुल महिपालपुर और सैद उल अजायब जैसे इलाकों में कुछ मतदान केंद्रों पर सुबह के समय लंबी कतारें देखी गयीं। सुबह के वक्त कतारों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग नागरिकों और महिलाओं को भी देखा गया।












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