पाकिस्तानी जेल पर तालिबान हमले के बाद 400 कैदी फरार

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इस्‍लामाबाद। उत्तर पश्चिम पाकिस्तान के जेल पर आज रॉकेट और स्वचालित हथियारों से लैस 100 से ज्यादा तालीबान लड़ाकों के हमले के बाद 384 कैदियों सहित कुछ खतरनाक उग्रवादी जेल से फरार हो गए। खैबर पख्तूनख्वा के सूचना मंत्री मियां इफ्तिखार हुसैन ने कहा कि बन्नू शहर स्थित केंद्रीय कारागार पर तालीबान लड़ाकों ने स्थानीय समयानुसार डेढ़ बजे दिन में रॉकेट और ग्रनेड से हमला किया जिसके बाद 20 उग्रवादी समेत कैदी फरार हो गए।

फरार उग्रवादियों में कुछ विदेशी लड़ाके शामिल हैं। फरार हुए कैदियों में अदनान कुरैशी भी शामिल है। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की हत्या का प्रयास करने के दोषी कुरैशी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। जेल के अधिकारियों के मुताबिक हमले के वक्त कुल 944 कैदी जेल में थे । इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान ने ली है।

तालीबान के प्रवक्ता एहसानुल्ला एहसान ने फोन पर संवाददाताओं से बातचीत में इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने बताया कि हमलावर और फरार कैदी भिन्न जगहों की ओर रवाना हो चुके हैं। हमलावर कार में जेल परिसर पहुंचे थे और फिर एक ट्रक पर सवार हो गए। उन्होंने जेल के रास्ते में अंधाधुंध गोलियां बरसाईं और ग्रेनेड से भी हमला किया। यह हमला करीब दो घंटे तक चला। इसके दौरान उग्रवादियों और पुलिस के बीच जमकर गोलीबारी हुई। हमलावर जेल के छह बैरेक पर ध्यान केंद्रित किए थे।

पुलिस अधिकारी साहिब जान के अनुसार मृत्यु की सजा का इंतजार कर रहे कैदियों के खंड के ताले को उग्रवादियों ने ही तोड़ा। यहां प्राप्त खबर के अनुसार इस गोलीबारी में दर्जनों कैदी और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं । उग्रवादी अंधेरे का फायदा उठा भागने में सफल रहे । खोज अभियान शुरू करने से पहले पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकडि़यों ने जेल को घेर लिया और इलाके की नाकेबंदी कर दी।

अधिकारियों ने बताया कि उनका अनुमान है कि ये उग्रवादी उत्तरी वजीरिस्तान के कबाइली इलाकों से आए थे। सूचना मंत्री हुसैन ने कहा कि जेल में पुलिस होने के बाद भी हमला कैसे नहीं रोका जा सका और हमला शुरू होने पर सुरक्षा बलों के पहुंचने में देरी क्यों हुई, इस बात की जांच अधिकारी करेंगे। उन्होंने बताया कि हमला करने से पहले उग्रवादी सभी रास्ते बंद कर चुके थे। रिपोर्ट के मुताबिक पास के कोहाट और लक्की मारवात जेल से कई उग्रवादी बन्नू जेल में लाए गए थे, जिसे पूर्व विद्रोहियों के पुनर्वास केंद्र में परिवर्तित किया गया है।

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