पहला सोलर ज़ू होगा उत्तर प्रदेश के लखनऊ में

आजकल हर जगह चाहे दफ्तर हो, शोपिंग मॉल हो, सरकारी कार्यालय हो बस एक ही नोटिस जगह जगह चिपका नज़र आता है कि बिजली का उपभोग सिर्फ ज़रुरत पर ही करे उसे व्यर्थ में बर्बाद न करें और जितना हो सके बिजली का संरक्षण करें अब व्यक्ति इस बात को कितनी गंभीरता से लेता है ये या तो व्यक्ति पर निर्भर करता है या उस संस्था पर जहाँ वो काम करता है। खैर जो भी हो, आपको बताते चले कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित लखनऊ प्राणी उद्यान बिजली कि बचत के लिए भरसक प्रयास करता नज़र आ रहा है जहाँ बहुत जल्द एक सोलर पार्क विकसित होगा।
सोलर पार्क से न सिर्फ प्राणी उद्यान सौर्य ऊर्जा संरक्षण से बिजली की बचत कर पायगा बल्कि उस खर्चे में भी चिड़ियाघर को राहत मिलेगी, जो वहां बिजली के बिल पर व्यय होता है। वन इण्डिया डॉट इन से हुई ख़ास बातचीत में चिड़ियाघर की निदेशक रेनू सिंह ने जानकारी देते हुए बताया की ये परियोजना अपने आप मे पहली ऐसी परियोजना है जहाँ किसी प्राणी उद्यान को सोलर तंत्र मे चलाने की पहल की गई है और ये भारत का पहला सोलर चिड़ियाघर होगा।
रेनू सिंह बताती हैं कि सन 2009 में प्राणी उद्यान कैम्पस मे एक बैठक हुई थी। जिसमे बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने चिड़ियाघर को ऊर्जा पार्क बनाने की बात कही थी और ज़ू को निर्देशित किया था की वो इस सम्बन्ध मे उपरोक्त योजना के लिए जगह मुहय्या कराये। लेकिन प्राणी उद्यान ने उसी समय ये स्पष्ट कर दिया था कि परिसर के पास कोई अतिरिक्त जगह नहीं है। जिसके चलते गैर परंपरागत ऊर्जा विकास एजेंसी, (नेडा) उत्तर प्रदेश ने संसाधनों को एकीकृत करके चिड़ियाघर मे इस परियोजना कि शुरुआत की।
इसके लिए चिड़ियाघर स्थित वन्य जीव चिकित्सालय मे एक सौर फोटो वोल्टेइक बिजली संयंत्र नर्सरी क्षेत्र के लिए सौर फोटो वोल्टेइक पंप, वन्य जीव चिकित्सालय और भोजनालय के लिए सौर जल तापन प्रणाली प्राणी उद्यान के मुख्य मार्गों के लिए बैटरी द्वारा संचालित तीन पहियां वाहन (जो अभी तक प्राप्त नहीं हुए है ), संसाधन प्राप्त न होने के प्रश्न पर रेनू सिंह ने बताया कि मामला शासन स्तर का है, जहाँ कई चीज़ों के लिए फंड कि कमी है साथ ही रेस्टोरंट और वन्य जीव भोजनालय के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले समुदाय (कम्युनिटी) कुकर आदि चीज़ों को इसमें शामिल किया गया है।
चिड़ियाघर निदेशक ने ये भी बताया की प्राणी उद्यान में स्थित पूरा का पूरा भोजनालय पुर्णतः सौर्य ऊर्जा आधारित होगा। सालाना की जा रही बिजली की खपत पर उन्होंने ये भी बताया की चिड़ियाघर मे हर वर्ष करीब 8लाख रुपया बिजली पर खर्च होता है और इस परियोजना के शुरू होने से हर वर्ष इस खर्चे मे 40 से लेकर 50% तक की कमी मुमकिन है।
ये पूछे जाने पर कि इस सोलर पार्क से राजधानी कि जनता कब से रु-ब-रु हो सकेगी चिड़ियाघर निदेशक बताती हैं कि नवंबर तक ये सेवा पूर्ण रूप से प्राणी उद्यान मे शुरू हो जायगी जहाँ इस परियोजना से चिड़ियाघर को लाभ होगा वहीं संगोष्ठियों और सेमिनारों के माध्यम से चिड़ियाघर घूमने आने वाली आम जनता को भी बताया जायगा कि कैसे वो सौर्य ऊर्जा का इस्तेमाल करते हुए पॉवर का संरक्षण करें और इसका इस्तमाल अपने दैनिक जीवन मे भी करें।
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