बंदरों की आएगी शामत, सरकारी योजना तैयार

Monkeys
चंडीगढ़। सबकी नाक में दम करने वाले बंदरों की अब शामत आने वाली है। राज्य सरकार आतंक का पर्याय बन चुके बंदरों पर नकेल डालने के लिए गंभीर हो गई है। यही कारण है कि प्रदेश के वन विभाग की एक टीम जल्द ही हिमाचल का दौरा कर वहां बंदर पकडऩे व उनके बंधीकरण की तकनीक की जानकारी हासिल करेगी।

एक अनुमान के अनुसार राज्य में करीब तीन लाख बंदर हैं। प्रदेश का ऐसा कोई शहर नहीं, जहां बंदरों का आतंक न हो। सोनीपत, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, झज्जर, पंचकूला और अंबाला शहर में सबसे अधिक बंदर हैं। बंदरों के आतंक के कारण पिछले दिनों कैथल में तीन बच्चों की जान चली गई थी।

लोगों को लाखों रुपये खर्च कर अपने घर को लोहे के जंगलों से कवर करना पड़ रहा है। बंदरों के आतंक के कारण लोग अपने छोटे बच्चे को अकेला नहीं छोड़ सकते। सोनीपत की भाजपा विधायक कविता जैन ने हाल ही में विधानसभा में बंदरों की समस्या को उठाया है।

हरियाणा में बंदरों की समस्या पर काबू पाने के लिए कोई प्रभावी कार्ययोजना नहीं होने के बावजूद पांच साल में 38239 बंदरों को पकड़कर अन्यत्र छोड़ा गया है। यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। बंदर वापस शहरी इलाकों में लौट आते हैं। हिमाचल प्रदेश में बंदरों की तादाद नौ लाख के आसपास है। वहां राज्य सरकार ने अगले छह माह में दो लाख बंदरों की नसबंदी का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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