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जालसाजी जैसे मामलों में मकोका नहीं

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दिल्ली (ब्यूरो)। दिल्ली की एक अदालत ने साफ कर दिया है कि जालसाजी जैसे मामलों में मकोका के आरोप नहीं तय किए जा सकते । जालसाजी के एक मामले में छह आरोपियों को रिहा करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया। स्पेशल सेल ने 2009 में विपिन शर्मा, हनी शर्मा, सचिन शर्मा, हरशद आलम, अमन आलम और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ मकोका, फर्जीवाड़ा, जालसाजी, पासपोर्ट एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

तीस हजारी अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सविता राव ने फैसले में कहा कि महज फर्जीवाड़े और जालसाजी के आरोपों के आधार पर मकोका के आरोप तय नहीं किए जा सकते। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी सबूत पेश नहीं कर पाया, जिसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ मकोका के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया जाए। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ जिन धाराओं में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं, उनकी सुनवाई मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में हो सकती है।

कोर्ट ने मामले से जुड़ी फाइल सीएमएम कोर्ट भेज दी है। पेश मामले के मुताबिक, स्पेशल सेल ने वर्ष 2009 में विपिन शर्मा, हनी शर्मा, सचिन शर्मा, हरशद आलम, अमन आलम और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ मकोका, फर्जीवाड़ा, जालसाजी, पासपोर्ट एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

पुलिस की ओर से कहा गया था कि आरोपियों पर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में लगभग दो दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसी ने यह भी कहा था कि आरोपी मिलकर सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। इनके पास से पुलिस ने कई पैन कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड, वीजा डेबिट कार्ड्स, कई पासपोर्ट और अन्य कागजात बरामद किए थे। फर्जी वीजा बनाने में प्रयोग होने वाला कंप्यूटर और प्रिंटर भी उनके पास से बरामद हुआ था।

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