लड़के की चाह में लड़की हुई लावारिस, होगा डीएनए टेस्ट

बच्ची गत 25 मार्च से अपने जन्म के बाद से ही लावारिस हालत में छोड़ दी गई थी। उसके वास्तविक माता पिता की पहचान के लिए डीएनए परीक्षक का इंतजार है। उसका जन्म उसी रात को हुआ था जिस दिन अस्पताल में एक बच्चे का जन्म हुआ था। दो दम्पति लड़के पर दावे को लेकर झगड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बच्चों को बदल दिया।
गौरतलब है कि दस दिन की एक नवजात बच्ची अस्पताल में लावारिस स्थिति में है क्योंकि उसी रोज जन्मे एक लड़के पर दो दंपति अपना अपना दावा कर रहे हैं। इस घटनाक्रम पर राजस्थान उच्च न्यायालय और राज्य महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। 25 मार्च को अस्पताल के कर्मचारियों की गलती से लड़के और लड़की की अदला बदली हो गई थी जिसे बाद में दंपतियों ने स्वीकार नहीं किया और अभी वह बच्ची जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में नर्सरी इकाई में निगरानी में है।
इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने इस मामले को लिंग अनुपात की विषम स्थिति को देखते हुए गंभीर करार दिया था। अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को बच्ची को सुरक्षा प्रदान करने और उसका अधिकार दिलाने की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।
अदालत ने सीजेएम से 20 अप्रैल तक स्थिति रिपोर्ट मांगी है और लड़की की सहायता करने के लिए वकील राज लक्ष्मी चौधरी को नियुक्त किया है। जयपुर में राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष लाद कुमारी जैन ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर स्तब्धता व्यक्त की है और अस्पताल के अधीक्षक को नाटिस जारी किया है।












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