केंद्र सरकार को बताये बिना दिल्‍ली की तरफ कूच कर रही थी सेना

Army
दिल्‍ली। अगर सही समय पर भारतीय सेना को रोका नहीं गया होता तो आज देश में पाकिस्‍तान जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी। भारत की सुरक्षा को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्‍सप्रेस ने यह दावा किया है कि 16 और 17 जनवरी की रात भारतीय सेना की दो टुकडि़यां केंद्र सरकार को बिना बताये दिल्‍ली की तरफ बढ़ रहीं थी और राजधानी के बेहद करीब तक आ चुकीं थी। अखबार की मानें तो इनमें एक टुकड़ी 33वीं आर्मर्ड डिविजन की मेकेनाइज्‍ड इनफैन्‍ट्री थी जो हिसार से दिल्‍ली की तरफ बढ़ रही थी। उसी समय आगरा से भी 50 पैरा ब्रिगेड की एक टुकड़ी दिल्‍ली की तरफ बढ़ रही थी।

हालांकि सरकार और रक्षा मंत्रालय ने अखबार के इस दावे को खारिज कर दिया है। रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा ने कहा कि यह सेना का रूटीन अभ्‍यास था। उन्‍होंने कहा कि सेना का इरादा गलत नहीं था। वहीं भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कर दी है। गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री को सफाई देनी चाहिए जिससे की भारतीयों का भरोसा ना डगमागाए।

अखबार ने यह भी दावा किया है कि जब सेना के इस मूवमेंट की जानकारी सूचना रक्षा मंत्रालय को मिली तो डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी को तलब किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी से दोनों टुकड़ियों को वापस भेजने को कहा गया था। अखबार के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी ने रक्षा मंत्रालय से कहा था कि यह रूटीन अभ्यास है, जहां सेना कोहरे में मूवमेंट का अभ्यास कर रही थी।

इस पूरे मामले में खास बात यह है कि उम्र विवाद में सरकार के खिलाफ आर्मी चीफ वीके 16 जनवरी को ही सुप्रीम कोर्ट गए थे। इस मुद्दे के चलते सरकार और सेना के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे। यही वजह है कि सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली की तरफ बढ़ने की खबर मिलने पर सरकार बेहद सतर्क हो गई थी। खबर मिलते ही पूरे मामले की जानकारी रक्षा मंत्री को दी गई। सरकार फौरन हरकत में आई और सेना की टुकड़ियों के मूवमेंट में देर करने के लिए टेरर एलर्ट भी जारी किया गया। पुलिस को हिदायत दी गई कि दिल्ली की तरफ आने वाले हर वाहन की सावधानी से जांच की जाए। इसका मकसद ट्रैफिक की रफ्तार को कम करना था।

अखबार के मुताबिक 17 जनवरी की सुबह पूरे मामले की जानकारी प्रधानमंत्री को भी दे दी गई थी। अखबार ने यह भी दावा किया है कि इसी वजह से रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा को मलेशिया का दौरा बीच में रद्द करके वापस बुला लिया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने भारत लौटने के बाद देर रात अपना ऑफिस खोला और डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी को तलब करके उनसे पूछा कि क्या हो रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने रक्षा सचिव को बताया कि ये रूटीन एक्सरसाइज़ है, जिसका मकसद कोहरे के दौरान तेज़ी से कार्रवाई करने की क्षमता को जांचना है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी से कहा गया कि दोनों टुकड़ियों को फौरन वापस भेजा जाए। कुछ ही घंटों के भीतर दोनों ही टुकड़ियों को रोककर वापस भेज दिया गया। तब तक हिसार से दिल्ली की तरफ बढ़ रही मेकेनाइज्ड यूनिट दिल्ली के नजफगढ़ से सटे बहादुरगढ़ इलाके तक आ चुकी थी।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सेना की यह टुकड़ी उस वक्त बहादुरगढ़ के एक इंडस्ट्रियल पार्क में रुकी हुई थी। अखबार के मुताबिक पारस या पैरा ब्रिगेड की टुकड़ी, जो आगरा से दिल्ली की ओर बढ़ रही थी वो पालम के करीब तक आ चुकी थी। अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि उस दिन सरकार के भीतर भ्रम और बेचैनी का माहौल था।

इस पूरे मामले के बाद कुछ अहम सवाल उभर का सामने आ रहे हैं जिसका जबाब ढूंढना बेहद ही आवश्‍यक है। सेना के इस मूवमेंट की जानकारी रक्षा मंत्रालय को पहले क्यों नहीं दी गई? क्‍या सच में इन टुकडि़यों को राजधानी के इतने नजदीक तक आना था? इस मूवमेंट की जानकारी भारतीय वायुसेना को क्यों नहीं दी गई? इस मसले पर आपकी क्‍या राय है हमें जरुर बताईए। अपनी राय हमतक पहुंचाने के लिये नीचे दिये गये कमेंट बाक्‍स में लिखें।

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