बैंक की नौकरी छोड़ कर बने ठग

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दिल्ली (ब्यूरो)। एजुकेशन लोन देने के नाम पर छात्रों को ठगने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा है। इसमें बैंक की नौकरी छोड़ चुके चार युवकों के अलावा आठ युवतियां भी शामिल हैं। ये लोग 100 से ज्यादा छात्रों से 45 लाख से ज्यादा ठग चुके हैं। हालांकि ये युवतियां यहां पर बतौर कर्मचारी काम करती थी, उन्हें दस हजार रुपये महीने मिलते थे।

पुलिस ने लोन ठग संदीप कक्कर (25), इसके भाई विशालदीप कक्कर (22), संदीप बजाज (25) और रामअबतार (27) को गिरफ्तार किया है। ये बदमाश प्राइवेट बैंक में नौकरी करते थे। नौकरी छोड़ कर ये बदमाश ठगी के धंधे में जुट गए थे। बदमाश 100 से ज्यादा छात्रों से 45 लाख से ज्यादा ठग चुके हैं। ठगी के लिए आरोपी राष्ट्रीय समाचारपत्रों में विज्ञापन देते थे। पुलिस को गिरोह के 36 बैंक खातों का पता लगा है। सभी खाते फर्जी आईडी पर खोले गए थे। गिरोह के बदमाश दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के छात्रों को शिकार बनाते थे।

अपराध शाखा उपायुक्त अशोक चांद के अनुसार मॉडल टाउन निवासी छात्र संदीप (परिवर्तित नाम) ने शिकायत की थी कि होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी। इसने एक अखबार में मात्र 250 रुपये में रोटोमैक्स कंपनी से एजुकेशन लोन लेने का विज्ञापन देखा। विज्ञापन में कुछ मोबाइल नंबर दिए गए थे। नंबर पर फोन करने पर एक युवती ने तीन लाख का एजुकेशन लोन देने की हामी भरी। दूसरी युवती ने फोन कर संदीप को 250 रुपये जमा कराने को कहा। इसके बाद कुछ न कुछ बहानेबाजी से संदीप से 16 हजार से ज्यादा ठग लिए गए। लोन का चेक नहीं आने पर संदीप ने इसकी शिकायत अपराध शाखा में की। इंस्पेक्टर आरती शर्मा की टीम ने सेक्टर-आठ, रोहिणी में दबिश देकर सभी को दबोच लिया। इन्हाेंने बताया कि ये एक साल से ठगी के धंधे में लगे हुए थे।

बदमाश समाचारपत्रों में विज्ञापन निकालते थे। मात्र 250 रुपये में जल्द ही एजुकेशन लोन देने का विज्ञापन होता था। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर फर्जी आईडी से लिए होते थे। विज्ञापनों में फर्जी कई कंपनियों के नाम दिए होते थे। जब कोई छात्र फोन करता था तो उससे पहले 250 रुपये जमा करा लेते थे। इसके लिए बैंक एकाउंट नंबर देते थे। फिर कागजों का वेरीफिकेशन कराने के नाम पर 5000 रुपये जमा करा लेते थे। लोन की रकम का इंश्योरेंस कराने के नाम पर 10000 खाते में जमा करा लेते थे। इसके बाद ड्राफ्ट फीस के नाम पर 1550 रुपये ले लेते थे।

पुलिस ने आरोपियों के 36 बैंक खातों का पता लगाया है। सभी खाते फर्जी कागजातों के आधार पर खोले गए थे। आरोपियों ने युवतियों को दस हजार रुपये प्रति महीने की तनख्वाह पर रखा हुआ था। डीयू ग्रेजुएट संदीप बजाज बैंक खाते खोलने के लिए फर्जी कागजात बनाता था। वह बैंक खाता खोलने की एवज में 40 हजार रुपये लेता था।

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