अखिलेश के फरमान से पार्टी कार्यकर्ता मायूस

इस संबंध में जारी दिशा निर्देश के अनुसार पार्टी की राष्ट्रीय तथा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष, शहर अध्यक्ष, जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री और कोषाध्यक्ष ही अपनी गाडिय़ों पर झंडे लगा सकेंगें। पूर्व जिला तथा शहर अध्यक्षों को भी पार्टी के झंडे लगाने की अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी।
चुनाव परिणाम आने के बाद कई जगह हुई आपराधिक घटनाओं और शपथ ग्रहण समारोह में कार्यकर्ताओं के उत्पात से नाराज मुख्यमंत्री ने पार्टी की छवि बनाने के लिए यह निर्णय लिया है। अखिलेश यादव ने चुनाव प्रचार के दौरान कई बार कहा था कि कानून व्यवस्था बनाये रखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने कहा था कि चुनाव प्रचार में उन्हें सफाई देनी पड़ती थी कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।
वह पार्टी को पुरानी छवि से उबारना चाहते हैं इसीलिए शपथ ग्रहण समारोह में उत्पात करने वाले दस कार्यकर्ताओं को कल पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उत्पात करने वालों को पार्टी से निकालकर सपा ने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि उपद्रवियों और पार्टी की छवि खराब करने वालों को बक्शा नहीं जायेगा। अब देखना यह होगा की अनुशासन का डंडा चलाकर पार्टी अपनी गुंडाराज छवि से कितना बाहर निकल पाती है। बहरहाल कार्यकर्ताओं का उत्साह उफान पर है। जोश में होश होने वाले कार्यकर्ताओं से सपा कैसे निपटती है?
अगर मायूस कार्यकर्ताओं की बात करें तो सीतापुर के एक कार्यकर्ता ने वनइंडिया से कहा कि अखिलेश को सीट मिल गई हमें खुशी है, मुलायम को सत्ता मिली हमें डबल खुशी है, विधायकों को सदन में सीट मिलने पर भी हम खुश हुए, लेकिन हमें क्या मिला। अगर हम वाहन पर झंडा लगाकर उत्पात मचायें तब कार्रवाई करें तो ठीक भी है, लेकिन अपने शहर में साफ सुथरी छवि रखने के बावजूद हम झंडा नहीं लगा सकते, यह गलत है। खैर फरमान हो भी हो, हम उसे सर आंखों पर ही रखेंगे।












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