आम बजट में महंगाई बढ़ना लगभग तय

मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
- चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहेगी।
- 2012-13 में आर्थिक वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत और 2013-14 में 8.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- आगामी महीनों में महंगाई दर में गिरावट की उम्मीद है।
- मुद्रास्फीतिक दबाव घटने पर ब्याज दरों में कटौती करेगा रिजर्व बैंक।
- डीजल के दामों की समीक्षा हो, इसकी सबसिडी कम हो।
- घरेलू वित्तीय बाजार की गहराई बढ़ाने की जरूरत।
- समर्पित बुनियादी ढांचा कोष आकर्षित करने पर जोर।
- अर्थव्यवस्था में निवेश की वृद्धि दर में गिरावट का अनुमान।
- ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से उधारी की लागत बढ़ी।
- उधारी की उंची लागत और अन्य लागतों की वजह से मुनाफा और आंतरिक संसाधन घट रहे हैं।
- वैश्विक कारकौं के अलावा घरेलू कारकों से भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटी।
- कड़े मौद्रिक रुख, महंगाई की उंची दर से निवेश और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित।
- महंगाई अभी भी उपर। हालांकि वित्त वर्ष के अंत तक इस में गिरावट का संकेत।
- जनवरी, 2012 में थोक खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 1.6 प्रतिशत पर आई। फरवरी 2010 में यह 20.2 प्रतिशत के स्तर पर थी।
- भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से।
- चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में निर्यात 40.5 प्रतिशत और आयात 30.4 फीसद बढ़ा।
- विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा। धान उत्पादन में बढ़ोतरी से खाद्यान्न उत्पादन 25.04 करोड़ टन से अधिक रहने का अनुमान।
- कृषि और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद।
- औद्योगिक वृद्धि दर 4 से 5 प्रतिशत के दायरे में रहेगी। आगे इसमें और सुधार होगा।
- वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार अभी भी धीमी। सरकारी ऋण संकट से निपटने को उपाय की जरूरत।
- बचत खातों को प्रगतिशील तरीके से नियंत्रण मुक्त किए जाने से वित्तीय बचत बढ़ी।
- सतत विकास और जलवायु परिवर्तन वैश्विक चिंता का विषय।
- भारत भी इससे चिंतित। वैश्विक वार्ताओं में इस मुद्दे पर रचनात्मक तरीके से शामिल।












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