बढ़ती उम्र सीखाती है खुश रहना और जिंदगी से लड़ना

वारविक यूनिवर्सिटी की ओर से कराये गये इस शोध से पुरानी धारणा गलत साबित होती है कि बुढ़ापे में लोग सठिया जाते हैं और चिड़चिड़े हो जाते हैं। यह शोध अमेरिका और ब्रिटेन में दस हजार से अधिक लोगों पर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक क्षमताएं तो कम होती है लेकिन मानसिक संतुष्टि में वृद्धि होती जाती है जिसके चलते लोग ज्यादा खुश हो जाते हैं।
इस अध्ययन में कहा गया है कि खुशी का पैमाना एक यू का आकार बनाता है जिसका अर्थ है कि करीब 45 साल की उम्र में यह सबसे कम रहता है और उसके बाद ऊपर की ओर चढ़ना शुरू कर देता है। यही कारण है कि बढ़ती उम्र के लोग छोटी-छोटी बातों से परेशान नहीं होते हैं और छोटी-छोटी खुशियों से खुश हो जाते हैं।












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