ये कैसी राहत, महिलाओं को हेलमेट से आजादी

दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि टू व्हीलर के पीछे बैठी महिलाओं को हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं है बल्कि यह उनकी इच्छा पर निर्भर है। सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क महिलाओं को हेलमेट पहनने से प्रदान छूट प्रदान करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के आधार पर रखा। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलों की खंडपीठ के समक्ष परिवहन विभाग ने शपथपत्र दाखिल कर पक्ष रखा। विभाग ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत टूव्हीलर के पीछे बैठी महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट है। यह महिलाओं पर निर्भर है कि वे स्वयं चाहे तो हेलमेट पहन सकती हैं। इसके अलावा विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा छूट को समाप्त करना फैसले का उल्लंघन होगा। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 24 अप्रैल तय की है।
खंडपीठ सामाजिक फिल्म निर्माता उल्लास द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में उन्होंने सिख समुदाय और महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट प्रदान करने संबंधी दिल्ली मोटर वाहन रूल को चुनौती दी है। याची के अधिवक्ता ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम में दो पहिया वाहन चालक और उसके पीछे बैठने वाले हर व्यक्ति को हेलमेट पहनना अनिवार्य है।
कुछ वर्ष पूर्व एक याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार को इस कानून को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया था। सरकार ने कुछ कारणों से दिल्ली मोटर वाहन रूल बनाकर सिख समुदाय और वाहन के पीछे बैठी महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट प्रदान कर दी है। याची ने कहा कि प्रतिवर्ष 60 से 70 महिलाएं हेलमेट न पहनने के कारण सिर की चोट से दम तोड़ रही है। हेलमेट सभी की सुरक्षा के लिए है। संविधान में लिंगभेद और धर्म के आधार पर किसी को भी छूट प्रदान नहीं की जा सकती। लिंगभेद और धर्म की अपेक्षा हर व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा जरूरी है।












Click it and Unblock the Notifications