वाकई होली मुहब्बत का त्योहार है...

अंकुर शर्मा
होली का मतलब ही प्रेम है...अक्सर लोग कहते हैं कि यह वो त्योहार है जब लोग एक -दूसरे के गिले-शिकवे भूल कर गले लग जाते हैं इसलिए प्रेम जताने के लिए होली से बढ़िया पर्व और कोई नहीं। दूसरे शब्दों में कहे तो होली पर्व मुह्ब्बत का नाम है, जिसकी मिठास हमारे दिलों में हमेशा तरों-ताजा रहती है। आज मैं आपको ऐसी ही मिठास भरी होली के बारे में बताती हूं। जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यूपी के जिले जौनपुर से मेरा काफी लगाव है। मेरी शिक्षा-दीक्षा वहीं पर हुई है।

अपनी पढ़ाई के दौरान मैं वहां हास्टल में रहा करती थी। जहां की अटेंडट एक 25-30 साल की उम्र की महिला थी। हास्टल में काफी लड़कियां उससे उम्र में बड़ी थीं जो अक्सर उसपर रौब जमाती थीं। वो 10वीं तक पढ़ी हुई थी। चाहे लड़कियां और हास्टल के स्टॉफ उसे कुछ भी कहे लेकिन वो पलट कर जवाब नहीं देती थी। चेहरे पर उदासी और फीके कपड़े पहनें वो महिला हमेशा हर काम बहुत अच्छे से करती थी लेकिन किसी से कोई बात नहीं करती थी। साल में 365 दिन काम करने वाली वो महिला हमेशा हर सेलिब्रेशन से दूर रहती थी। उसकी सादगी और सीधाई के चलते वो कई लड़कियों की फेवरेट भी थी जिसमें मैं भी शामिल थीं।

हमारे हॉस्टल में एक नया सेक्यूरिटी गार्ड आया जो कि अपने काम में काफी अच्छा था, उससे उस महिला की बातचीत शुरू हो गयी। जिस महिला के चेहरे पर केवल उदासी दिखती थी, अब वो मु्स्कुराहट से लबरेज रहने लगा। सुंदर तो वो पहले सी थी, हंसी और खुश रहने से लोगों को पता चलने लगा कि उसके मुंह में भी आवाज है। होली करीब थी, विश्वविद्यालय में छुट्टियां हो गयीं लेकिन हर हॉस्टल का नियम है होली खेलकर ही लोग घर जाते हैं सो हा़स्टल में भी रंग शुरू हो गया।

लोगो को जो मिला उसी को रंग पोत दिया। सारा स्टाफ, सारे स्टूडेटं सभी एक-दूसरे को रंग लगाते थे, सो रंग खेलते हुए सिक्योरिटी गार्ड ने अटेंडेट के चेहरे पर भी गुलाल लगा दिया जिससे उसका पूरा चेहरा लाल रंग से दमकने लगा। लेकिन खुश होने की बजाय वो अटेंडेट रोने लगी औऱ रोते हुए वहां से चली गयी। यह सब कुछ पूरे हास्टल वालों के सामने हुआ था इसलिए हर कोई हैरान औऱ परेशान था।

खैर होली खेलने के बाद सभी लोग घर चले गये और जब छु्ट्टी के बाद लौटे तो पता चला कि अटेंडेट ने नौकरी छोड़ दी है। थोड़ा सा लोगों को हैरानी तो हुई लेकिन फिर सब लोग अपने काम में मगन हो गये दिन बीतने लगे और पूरा एक साल हो गया। लोग इस प्रकरण को भूल गये और फिर से होली का इंतजार करने लगे। लेकिन एक चीज जरूर लोगों ने नोटिस की वो यह कि हमेशा खुश रहने वाला सिक्योरिटी गार्ड अब बेहद गुमसुम रहने लगा था। उसकी सेहत भी गिरने लगी थी। और होली की छुट्टी के एक दिन पहले सुनने में आया कि वो बेहोश होकर हॉस्टल कैंपस में गिर गया है और उसे अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टर ने बोला कि हालत ठीक नहीं है, इसलिए इसके घरवालों को खबर कर दें। उसके घर में बस एक बूढ़ी मां थी जिसे खबर दे दी गयी और वो रोते-बिलखते अस्पताल पहुंची। वो बार-बार यही कह रही थी आखिर उसने मेरे बेटे को बर्बाद कर ही दिया। तब जाकर पता चला कि वो महिला एक बाल विधवा थी जो कि अपने सुसराल में रहती थीं। लेकिन ससुराल वाले उसे बेहद घृणित रूप में देखते थे। इस सिक्योरिटी गार्ड को भी पहले से पता नहीं था कि उसकी सच्चाई। वो तो इसे दिल से प्रेम करता था, इसलिए उसने होली वाले दिन अपने प्रेम की बात गुलाल लगाकर उसे बताई थी जिसके बाद से अटेंडेट ने नौकरी छोड़ दी थी।

सिक्योरिटी गार्ड उसके बारे में जानने के लिए उसके घर भी गया था, जहां से उसे उसके बारे में जानकारी मिली थी। लेकिन गार्ड के घर पहुंचने पर एक नया बवाल मच गया, महिला के ससुराल वालों ने उस पर चरित्रहीन होने का आरोप लगा दिया और गार्ड को धमकी दी कि अगर वो फिर से इधर आया या उससे मिलने की कोशिश की तो जान से मार देगें। जिसके बाद से गार्ड की यह हालत हो गयी और उसकी सेहत गिरने लगी जिसके चलते वो हॉस्टल गेट से अस्पताल पहुंचा। पूरे हॉस्टल ने इस बार होली नहीं खेलने का फैसला किया।

सब ने मिलकर गार्ड के ठीक होने की कामना की और उसके लिए चंदा इक्टठा किया। पैसे लेकर जब हम लोग अस्पताल पहुंचे उसकी मां को देने के लिए तो वहां का माहौल देखकर सब हैरान रह गये। वो अटेंडेट गार्ड के सिरहाने बैठकर उसे माथे पर पानी की पट्टियां रख रही थीं। और गार्ड भी पहले से काफी ठीक था। उसकी मां ने हम लोगों को देखा तो हंसते हुए बाहर आयी और कहा कि अब मेरा बच्चा ठीक हो जायेगा क्योंकि उसे जो चाहिए था वो मिल गया है।

महिला अपना सब कुछ छोड़कर गार्ड के पास आ गयी है और उसने बोला कि वो भी उससे प्रेम करती है। वो अपनी पूरी जिंदगी उसके साथ बिताना चाहती है। वो बालिग है इसलिए उसके ससुराल वाले भी उसे शादी करने से रोक नहीं सकते हैं, वैसे भी वो लोग उससे सिर्फ काम करवाना चाहते थे। वो समाज के चलते अपनी बात कह नहीं पा रही थी लेकिन जब उसने गार्ड की बीमारी सुनी तो वो सब कुछ छोड़ कर वापस आ गयी। हम लोगों को तो जैसे भरोसा नहीं हुआ। हमने गार्ड की मां को चंदे के पैसे दिये और गार्ड और अटेंडेट को बधाई। जिस पर गार्ड ने मुस्कुराकर कहा कि पिछली होली में मैंने अपनी जिंदगी खोयी थी और इस होली पर फिर से पा ली है। कल हास्टल में होली जरूर मनेंगी। मैं जरूर आऊंगा।

और एक बार फिर से विश्ववि्द्यालय के हास्टल में पिचकारियां और फुहार का मौसम था और लोग नाच गा रहे थे फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार के जश्न में थिरकने वालों में से हमारी पुरानी अटेंडेट भी थी। वाकई यह होली मेरे जीवन की यादगार होली में से एक है, जिसने एक बार फिर से साबित कर दिया कि होली प्रेम का त्योहार है जो बिछड़े लोगों को मिलवा देती है।

आप भी लिख भेजिये अपनी होली के अनुभव - [email protected] को, हम उसे प्रकाशित करेंगे।

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