भाजपा में सीएम पद को लेकर से घमासान

यूपी चुनाव के लिये कल पांचवे चरण के मतदान के साथ 275 सीटों पर चुनाव पूरा होगा लेकिन भाजपा ने मु यमंत्री पद के लिये तीन अलग अलग नामों की दावेदारी दे दी है। छठे और सातवें चरण के चुनाव में 128 सीटों पर 28 फरवरी और तीन मार्च को मतदान होगा। भाजपा के इस तरह चार-चार नाम देने पर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
भाजपा में भी अपने-अपने नेता को लेकर खींचतान तेज हो गयी है। दरअसल भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने राजधानी लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा के स भावित मु यमंत्री के नामों पर चर्चा करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह, उपाध्यक्ष कलराज मिश्र और महोबा के चरखारी से चुनाव लड़ रहीं मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का नाम लिया था।
गडकरी ने चरखारी में एक सभा में कहा कि राज्य में पार्टी के बहुमत में आने पर उमा भारती के नेतृत्व में राज्य का विकास होगा और वह मुख्यमंत्री होंगी। उमा भारती ने जिस तरह अपने कार्यकाल में मध्यप्रदेश का विकास किया था, उसी तरह यूपी में भी काम करेंगी।
गडकरी के इस बयान से साफ है कि पार्टी में मुख्यमंत्री पद के लिये उमा भारती के नाम पर सहमति हो गयी है। इससे पहले वह देवरिया के पथरदेवा भी प्रचार के लिये गये थे जहां से प्रदेश अघ्यक्ष सूर्य प्रताप शाही चुनाव मैदान में हैं। गडकरी ने पथरदेवा की जनसभा में शाही का नाम मुख्यमंत्री पद के लिये दिया था। उनका कहना था कि भाजपा की सरकार बनने पर श्री शाही मुख्यमंत्री होंगे।
इससे पूर्व लखनऊ पूर्व सीट से चुनाव लड रहे पार्टी उपाध्यक्ष कलराज मिश्र ने उमा भारती को बाहरी बता कर उनकी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर सवाल खड़े कर दिये थे। पार्टी में मु यमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग कर लेने वाले राजनाथ सिंह ने लखनऊ में सभा में मुख्यमंत्री पद के लिये कलराज मिश्र का नाम सामने कर दिया।
राजनाथ के इस बयान ने भी पार्टी समेत सभी लोगों को चौंकाया। राजनीतिक जानकारों की मानें तो पिछड़ों के वोट और इन बडे नेताओं की जीत सुनिश्चित करने के लिये श्री गडकरी समेत कई बड़े नेता इनके मु यमंत्री बनने की चर्चा कर रहे हैं। दूसरी ओर पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि गडकरी ने उमा भारती का नाम मुख्यमंत्री पद के लिये दिया है। चुने विधायक और पार्टी हाईकमान ही नेता का नाम तय करेंगे। अपने बयान को लेकर बढ़े विवाद के बाद हालांकि राजनाथ सिंह ने बाद में अपने को इस पद से अलग कर लिया।












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