सिरसा में एकत्र हुए देश भर के पर्यावरणविद

सिरसा। जननायक चौधरी देवीलाल विद्यापीठ के इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय कांफ्रैंस का शुक्रवार को संपन्‍न हुई। इस अवसर पर दिल्ली की नगर पालिका के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मनजिंद्र सिंह 'सिरसा' बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। कार्यक्रम में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मार्केटिंग अध्यक्ष सतीश सती बतौर विशिष्ट अतिथि, हरियाणा कॉलेज ऑफ टेक्रोलॉजी एंड मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. डी.पी. गुप्ता बतौर सभापति उपस्थित हुए तथा जेसीडी विद्यापीठ की प्रबन्ध निदेशक डॉ. शमीम शर्मा द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता की गई।

कार्यक्रम से पूर्व एक टेक्रीकल सत्र भी रखा गया, जिसमें अप्लाईड साईंस एंड एन्वायरमेंट इंजीनियरिंग के क्षेत्र से सम्बन्धित शोधपत्र भी प्रस्तुत किए गए, जिसमें डॉ. स्मृति मोंगा ने साइपरमैथरीन उर्वरक की विभिन्न शाकों पर होने वाले प्रभावों का विवरण दिया, मिस रितु ने मानवजीवन के आण्विक स्तर पर आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। मिस मानिका खरब ने अपने शोधपत्र में फलाई ऐश का प्रयोग करके मृदा की उत्पादक क्षमता को बढ़ाने बारे अपने सुझाव रखे तथा बताया कि इससे फसलों को लाभ पहुंचता है न कि इसका कोई दुष्प्रभाव फसलों पर होता है। उन्होंने कहा कि किसान इसके माध्यम से कम लागत पर अधिक पैदावार ले सकते हैं। कांफ्रैंस में कुल 65 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए व 65 से अधिक पोस्टर भी प्रदर्शित किए।

इस समापन कार्यक्रम के प्रारंभ में जेसीडी इंजीनियरिंग कॉलेज प्राचार्य एवं कांफ्रैंस के संयोजक डॉ. गुरचरण दास ने समारोह में उपस्थित होने वाले अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस कांफ्रैंस में आने वाले सभी प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों एवं शोध विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किए गए दिशा-निर्देशों एवं ज्ञान के माध्यम से रिसर्च से सम्बन्धित अनेक भ्रांतियों को दूर करके तकनीक बारे भी उचित शिक्षा प्राप्त की होगी।

बतौर मुख्यातिथि अपने संबोधन में मनजिंदर सिंह 'सिरसा' ने कहा कि आधुनिक युग में जहां हमारी सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं इसके साथ-साथ पर्यावरण सम्बन्धी समस्याएं भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। हम नई-नई तकनीकों को तो लागू कर रहे हैं परंतु उनमें पर्यावरण को पहुंचने वाली हानियों बारे ध्यान नहीं दिया जाता, इसलिए ऐसे आयोजनों के द्वारा ही हम ज़ागरूकता ला सकते हैं तथा पर्यावरण को बचाने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे पर्यावरण को बचाने में अपना अहम योगदान प्रदान करें।

इस कांफ्रैंस में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सतीश सती ने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा सदैव चर्चा का विषय बना रहता है, जिसके बारे में अलग ढंग से सोचने की और कार्य करने की आवश्यकता है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रत्येक अंग का अपना अलग महत्व है, जिसके किसी भी अंग की अनदेखी करना गलत हो सकता है।

इस अवसर पर डॉ. डी.पी. गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि पर्यावरण सम्बन्धी समस्याएं स्वयं हमारे समाज द्वारा ही निर्मित हैं और सभी को इस बारे मंथन एवं विचार-विमर्श करके एकजुट होकर कार्य करना चाहिए तभी पर्यावरण को हम स्वच्छ एवं साफ-सुथरा बना सकते हैं। कांफ्रैंस की सफलता प्रदान करने के लिए डॉ. शमीम शर्मा ने इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य एवं संयोजक व समूचे स्टाफ सदस्यों को बधाई प्रेषित की तथा कहा कि इस कांफ्रैं स के माध्यम से पर्यावरण सम्बन्धी समस्याओं व जनजीवन पर पडऩे वाले इसके प्रभावों बारे जानकारी प्राप्त हुई है, जिससे सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों एवं संस्थानों में विद्यार्थियों को को अवगत करवाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर पर्यावरण स्वच्छ एवं साफ होगा तो अनेक भयानक बीमारियों एवं रोगों से निज़ात पाई जा सकती है, जिससे हमारा राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सुदृढ़ हो पाएगा, इसलिए हमें पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाने का प्रयास करना चाहिए।

इस मौके पर जेसीडी विद्यापीठ के त्रैमासिक पत्रिका 'जेसीडी टाईम्स' के चौथे अंक का भी विमोचन किया गया तथा एक पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें सनमीत व रेखा की टीम ने प्रथम स्थान, रामप्रकाश व पवन ने द्वितीय तथा रीना व प्रीतिका की टीम ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस अवसर पर विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान करके सम्मानित भी किया गया।

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