मोबाइल में नेटवर्क प्रॉबलम से मिलेगी निजात

अगर सरकारी योजना ने मूर्त रूप लिया तो मोबाइल नेटवर्क जाम की समस्या बीते दिनों की बात हो जाएगी। दरअसल, सरकार सेना के लिए वैकल्पिक नेटवर्क तैयार करने की कवायद तेज करने जा रही है। इसके लिए दूरसंचार विभाग को 5,000 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल गई है। नया नेटवर्क तैयार होते ही सेना अपना मौजूदा स्पेक्ट्रम आम मोबाइल सेवा के लिए छोड़ देगी।
योजना के अनुसार सेना के लिए वैकल्पिक नेटवर्क दूरसंचार विभाग तैयार करेगा। इसके एवज में सेना अपना मौजूदा स्पेक्ट्रम विभाग को सौंप देगी। ऐसा होने पर सरकार को आम जनता के मोबाइल नेटवर्क के लिए पहले से ज्यादा 2जी और 3जी स्पेक्ट्रम मिल जाएंगे। सरकार के पास फिलहाल टूजी और थ्रीजी स्पेक्ट्रम की किल्लत है, जो मोबाइल नेटवर्क जाम के रूप में लोगों को पीड़ा दे रही है।
सेना से स्पेक्ट्रम लेने के लेकर दूरसंचार विभाग का लंबे समय से विवाद चल रहा है। विभाग को सेना के लिए 60 हजार किमी. ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बनाना था। दूरसंचार विभाग ने इसे बनाने की जिम्मेदारी बीएसएनएल को दी थी, लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी रही, जिससे इसकी लागत बढ़ गई।
दूरसंचार विभाग को इसके लिए 9,175 करोड़ रुपये की मंत्रिमंडलीय मंजूरी पहले ही मिल चुकी है, लेकिन लागत बढ़ने की वजह से विभाग ने और 5 हजार करोड़ रुपये की मांग की थी। जिसे अंतर मंत्रालय समिति ने मंजूरी दे दी है। दूरसंचार विभाग के सूत्रों के मुताबिक इसका ऐलान आगामी आम बजट में हो जाएगा।
गौरतलब है कि स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर सेना और दूरसंचार विभाग के बीच 2009 में समझौता हुआ था। इसके तहत सेना को थ्रीजी सेवा के लिए 25 मेगाहर्ट्ज और टूजी स्पेक्ट्रम के लिए 20 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम छोड़ना था। वहीं, विभाग को इसके लिए ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बनाना था। सेना थ्रीजी सेवा के लिए 15 और टूजी के लिए भी 15 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम छोड़ चुकी है, जबकि थ्रीजी सेवा के लिए 10 और टूजी के लिए पांच मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम छोड़ना बाकी है। जिसे फाइबर नेटवर्क बनाने के बाद ही छोड़ा जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications