बसपा की राह मे मुसीबत बन गया कांग्रेस प्रत्याशी

नवसृजित इस विधानसभा क्षेत्र से 17 प्रत्याशी अपनी किस्मत अजमा रहे है। बहुजन समाज पार्टी ने पहले बावन क्षेत्र की विधायिका राजेश्वरी देवी को अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन बाद मे उनका टिकट काट कर उनकी ननद अनीता वर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। अनीता वर्मा वर्ष 1997 मे जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी है। इन्होने वर्ष 2004 मे हरदोई लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप मे चुनाव लड़ा था लेकिन पराजित हो गयी थी। वर्ष 2010 मे यह जिला पंचायत सदस्य तक का चुनाव हार गयी थी। अब यह अपनी भाभी का टिकट कट जाने से बसपा प्रत्याशी के रूप मे चुनाव लड़ रही है।
समाजवादी पार्टी ने श्याम प्रकाश को अपना प्रत्याशी बनाया है जिन्होने वर्ष 1996 मे अहिरोरी सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी के रूप मे चुनाव जीता था लेकिन वर्ष 2002 मे हुये चुनाव मे यह सपा प्रत्याशी ऊषा वर्मा से चुनाव हार गये थे इसके बाद इन्होने बसपा से किनारा कर सपा का दामन थाम लिया था तथा वर्ष 2004 मे सपा प्रत्याशी के रूप मे चुनाव जीत कर अहिरोरी से विधानसभा तक का रास्ता तय किया था। बसपा शासन मे श्याम प्रकाश को कुछ समय के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति निगम के अध्यक्ष बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया गया था। पिछला चुनाव इन्होने सपा के टिकट पर बावन विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था लेकिन बसपा प्रत्याशी राजेश्वरी से चुनाव हार गये थे।
अब राजेश्वरी बसपा का दामन छोड़ कर सपा प्रत्याशी के रूप में सांडी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस पार्टी ने सर्वेश जनसेवा को अपना प्रत्याशी बनाया है। यह युवक कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष के रूप मे पिहानी मे काफी पहले से सक्रिय थे। दो विद्यालयो के प्रबन्धक होने के चलते यह छात्रो मे अपनी अच्छी पकड़ रखते है। भारतीय जनता पार्टी ने कविता चंद्रा को अपना प्रत्याशी बनाया है। यह क्षेत्र के लिए बिल्कुल नई है इनके समर्थन मे क्षेत्र का कोई कद्दावर नेता सक्रिय रूप से क्षेत्र मे नजर नही आ रहा है।
सुनीता मित्रा को पहले पीस पार्टी का टिकट मिला था लेकिन बाद मे उनका टिकट काट दिया गया था जिसको लेकर सुनीता मित्रा ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा अयूब खां पर गम्भीर आरोप लगा कर कई दिनो तक मीडिया मे छाई रही थी अब यह निर्दलीय रूप से चुनाव का सामना कर रही है। सपा, बसपा एवं भाजपा एक ही समाज(पासी) के होने के कारण इस समाज का वोट तीनो प्रत्याशियो मे बंटने की सम्भावना है वही पिछड़े वर्ग का झुकाव सपा की ओर दिखाई पड़ रहा है।
कांग्रेस का प्रत्याशी रैदास बिरादरी का होने के चलते बसपा के आधार वोट मे सेंध लगा रहा है जिसकी कीमत बसपा को भुगतनी पड़ सकती है। दूसरी ओर श्याम प्रकाश के राजनीतिक अनुभव एवं कद के आगे अन्य प्रत्याशी बौने नजर आते है। सपा, बसपा और कांग्रेस के त्रिकोणीय संघर्ष मे विजयश्री किसको मिलेगी यह 19 फरवरी को मतदाताओ के रूख पर निर्भर करेगा।












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