19 फरवरी से फिर गूंजेगा जाट आरक्षण का शोर

यह गुट रैली की तैयारियों में जोर-शोर से लगा है लेकिन प्रदेशाध्यक्ष कमांडेंट हवासिंह सांगवान गुट इससे अलग ही बात कह रहा है। मंगलवार को हिसार पहुंचे कमांडेंट सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जाट समाज द्वारा लगभग चार सालों से अपने आरक्षण के अधिकार के लिए जगह-जगह धरना व प्रदर्शन करने के बावजूद जब सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो मजबूर होकर पिछले वर्ष माह माह में रेल रोको आंदोलन चलाना पड़ा, जिसका उद्देश्य केन्द्र व राज्य सरकार को बातचीत की टेबल पर लाना था ताकि जाट आरक्षण पर आगे की प्रक्रिया आरंभ हो सके।
कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने कहा कि रेल रोको आंदोलन के नतीजतन केन्द्र व राज्य सरकार ने टेबल पर आकर स्वीकार किया कि जाटों की मांग न्यायोचित व संवैधानिक है। राज्य सरकार ने अपने वायदे के अनुसार राज्य पिछड़ा आयोग का गठन किया और अपनी प्रक्रिया केअनुरूप अपनी सुनवाई को 13 फरवरी को पूरा कर लिया तथा समाज को आशा है कि आयोग जल्दी अपनी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंप देगा और जाट समाज के साथ पूरा-पूरा न्याय होगा।
कमांडेंट सांगवान ने कहा कि दूसरी ओर केन्द्र सरकार ने भी कानून में बदलाव करते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा को पुनर्विलोकन का अधिकार दे दिया है। इन सभी कार्रवाईयों को मद्देनजर रखते हुए जाट समाज ने अपना 13 सितम्बर 2011 को घोषित आंदोलन को 24 नवम्बर तक स्थगित कर दिया और इसके बाद आयोग की प्रगति को देखते हुए 19 फरवरी से 23 मार्च तक स्थगन को बढ़ा दिया। प्रदेशाध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि केन्द्र व राज्य सरकार उनके समाज के साथ विश्वासघात नहीं करेगा और 22 मार्च तक हमारे अधिकार की घोषणा कर देगा। यदि इसके बाद भी समाज को न्याय नहीं मिलता है तो 23 मार्च को पूर्व घोषणा के अनुसार आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व 22 फरवरी को प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री को 23 मार्च को होने वाले आंदोलन की लिखित चेतावनी भेज दी जाएगी।












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