कमल से कुछ और राज उगलवाएगी एनआईए

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दिल्ली (ब्यूरो)। समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट कांड के मामले में पुलिस ने कमल चौहान को पकड़ लिया है। एनआईए का दावा है कि उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि उससे एनआईए कुछ और राज उगलवाएंगी।

उधर कमल की पत्नी ने इंदौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसके मुताबिक कमल को पुलिस उसके गांव से पकड़ कर ले गई है। कमल को बेवजह फंसाया जा रहा है। कमल की पत्नी सीमा के मुताबिक एनआईए की टीम दस फरवरी को इंदौर के उसके गांव से कमल को पकड़ कर ले गई थी। अब पूरी नई कहानी बतायी जा रही है। एनआई ने जानबुझकर उसे नोएडा की अदालत मे पेश किया ताकि कमल को कानूनी मदद न मिल सके।

एसपी सिटी अनंत देव तिवारी ने नोएडा में बताया कि एनआईए के अधिकारियों ने थाना सेक्टर-24 पुलिस को सूचना दी कि एनआईए के ए ब्लाक सेक्टर-52 स्थित दफ्तर में पूछताछ के बाद कमल चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह 19 फरवरी 2007 को पानीपत के करीब हुए समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट कांड का आरोपी है। एनआईए के उपनिरीक्षक विजेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबिल मिथलेश कुमार, सिपाही संजय कुमार व बीपी सिंह आरोपी कमल चौहान को थाना सेक्टर-24 ले गए।

जीडी में उसकी गिरफ्तारी का उल्लेख करवाने के बाद उसे सूरजपुर स्थित जिला अदालत ले गए। जहां से एनआईए टीम कमल को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पंचकूला के लिए रवाना हो गई। थाना सेक्टर-24 में मौजूद एनआईए के एसीपी विकास कुमार ने बताया कि समझौता विस्फोट मामले में पूछताछ के लिए गांव मुरखेड़ा थाना देपाल पुर इंदौर मध्यप्रदेश निवासी कमल चौहान को समन भेजा गया था। इसके बाद कमल नोएडा एनआईए के ऑफिस आया। पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पाकिस्तान जाने वाली समझौता एक्सप्रेस की बोगी में कमल चौहान ने अपने एक साथी केसाथ मिलकर बम रखा था। बम रखने के लिए रामजी कलसांगरा और संदीप डांगे ने उसे प्रेरित किया और इंदौर से दिल्ली भेजा था। कमल के पिता खेती करते हैं। वहीं मां भूरीबाई बेटे के आंतकी घटना में शामिल होने से सकते में है। दादा राम सिंह ने पोते को बेगुनाह बताया है। समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट में 68 लोगों की मौत हो गई थी। जीआरपी करनाल में एएसआई रंजीत सिंह ने इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

सूत्रों के मुताबिक इस केस में हिंदू चरमपंथी संगठन का हाथ सामने आया था। इस मामले की रिपोर्ट जीआरपी करनाल में एएसआई रंजीत सिंह ने दर्ज कराई थी। केंद्र ने 26 जुलाई 10 को मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी। इसके बाद एनआईए केएसपी नितिश कुमार विस्फोट मामले की जांच कर रहे है। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, लोकेश शर्मा, संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा व कमल चौहान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। एनआईए स्वामी असीमानंद और लोकेश शर्मा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। रामजी और संदीप डांगे को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर रखा है, जबकि सुनील जोशी की हत्या कर दी गई है।

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