हर साल होती है 50 हजार करोड़ की बर्बादी

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नयी दिल्ली। शीतघरों की कमी के चलते देश में हर साल तकरीबन पचास हजार करोड़ रूपए मूल्य की पैदावार की बरबादी को रोकने के कदम उठाते हुए कैबिनेट ने कोल्ड चेन विकास के लिए राष्‍ट्रीय केन्द्र (एनसीसीडी) की स्थापना करने को आज मंजूरी दे दी। इसकी स्थापना सोसायटी अधिनियम के तहत की जाएगी और इसके लिए गठित समग्र निधि में 25 करोड़ रूपयों का एक बार का अनुदान दिया जाएगा।

हर साल 50 हजार करोड़ रूपए की बर्बादी रोकने के लिए बनेगी कोल्ड चेन सरकार की ओर से बताया गया है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने एनसीसीडी को सोसायटी के रूप में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम-1860 के तहत पंजीकृत कराने की आज मंजूरी दे दी है। इस फैसले के अंतर्गत एनसीसीडी सचिव की अध्यक्षता में 22 सदस्यीय गर्वनिंग काउंसिल इसकी देख रेख करेगी।

इस गर्वनिंग काउंसिल में विभिन्न सरकारी अधिकारी, सीआईआई, फिक्की जैसी उद्योग जगत की इकाइयों के प्रतिनिधि, उत्पादकों और कोल्ड चेन के उपकरण बनाने वाले निर्माताओं आदि सहित सभी संबंधित हितधारकों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। भारत फल, सब्जी, फूल, मसाले, नारियल, मशरूम और शहद आदि जैसे बागबानी के पैदावार में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

लेकिन शीतघरों की कमी के चलते हर साल 50 हजार करोड़ रूपए मूल्य के उसके ऐसे उत्पाद नष्ट हो जाते हैं। देश में प्रति वर्ष 7.15 करोड़ टन फल, 13.37 करोड़ टन सब्जी तथा 1.78 करोड़ टन फूल आदि की पैदावार होती है। इस बर्बादी का आंकलन करने और उसे दूर करने के उपाय सुभुााने के लिए सरकार ने कोल्ड चेन विकास पर कार्य बल का गठन किया था। इस कार्य बल ने कोल्ड चेन के विकास के लिये समर्पित संस्थान बनाने की सिफारिश की थी।

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