शीतलहर का प्रकोप जारी, ठिठुरन जारी

यहां पर खेतों में डेढ़ इंच तक बर्फ जम गई। अमूमन फरवरी माह में इस तरह से पाला जमना व शीत लहर चलना अपने आप में बड़ी बात है। मौसम वैज्ञानिक भी हैरान हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1929 में हिसार का तापमान शून्य से नीचे गया था। सुबह सड़कों के किनारे व खेतों में सफेद चादर बिछी नजर आई। मौसम विज्ञानियों ने अभी कई दिन तक शीतलहर चलने की संभावना जताई है।
बृहस्पतिवार को फतेहाबाद में -1.3, नारनौल में -0.5, करनाल में 1.2, कुरुक्षेत्र में 1.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। करनाल में फरवरी में पिछले 12 वर्षो का रिकॉर्ड टूटा। मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि कई दिन से चल रही शीतलहर व पाला पडऩे से तापमान में गिरावट आई है। 7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से प्रदेश में शीतलहर चल रही है। फरवरी में 12 साल में ऐसा दो बार ही ऐसा हुआ है जब पारा इतना गिरा हो। अब 12 व 13 फरवरी को बूंदाबांदी या बरसात के आसार बने हैं। इस के बाद 16 और 17 को इसी तरह का मौसम रह सकता है।यानि अगले 10 दिनों तक लोगों को ठंड से राहत के आसार कम हैं।












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